सत्या राजपूत, रायपुर। शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर पिछले दो माह से आमरण अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों ने आज मंत्रालय घेराव के लिए कूच किया। हालांकि पुलिस ने रास्ते में ही उन्हें रोक दिया। अभ्यर्थियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने ट्रक को बैरिकेड के रूप में खड़ा कर दिया, जिससे मौके पर तनाव की स्थिति बन गई।
बताया जा रहा है कि अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और लंबित पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनका आमरण अनशन तूता धरना स्थल पर जारी है। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक शासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।


मंत्रालय घेराव की घोषणा के बाद प्रशासन पहले से सतर्क था। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। जैसे ही अभ्यर्थियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, पुलिस ने उन्हें रोकते हुए बैरिकेडिंग कर दी। इस दौरान अभ्यर्थी नारेबाजी करते रहे और अपनी मांगों पर अड़े रहे। अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का आरोप है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बावजूद शिक्षा विभाग रिक्त पदों लगभग 2300 पर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कर रही है। वहीं प्रशासन ने शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है।

ये है पूरा मामला
नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर करीब दो महीने से डीएड अभ्यर्थियों का आमरण अनशन जारी है। यह आंदोलन सहायक शिक्षक भर्ती 2023 के शेष रिक्त पदों लगभग 1300-2300 पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर चल रहा है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने इन पदों पर नियुक्ति नहीं की, जबकि पहले बीएड धारकों को बर्खास्त कर डीएड वालों को अवसर दिया जाना था।
इतने दिनों से क्यों मौन हैं शिक्षा मंत्री?
आंदोलनकारियों ने सवाल उठाया है कि शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव और शिक्षा विभाग के अधिकारी इतने दिनों से क्यों मौन हैं?
क्या हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों (जैसे अप्रैल 2024, सितंबर 2025, अगस्त 2024) की अनदेखी हो रही है? अनशन के दौरान यदि किसी अभ्यर्थी की मौत हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा ? शिक्षा विभाग, स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन या पूरी सरकार?
160 से अधिक अभ्यर्थियों की बिगड़ चुकी है तबीयत
यह भर्ती विवाद पुराना है। पिछले तीन सालों से हक की लड़ाई जारी है। कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर डीएड को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद बीएड शिक्षकों की बर्खास्तगी हुई, लेकिन शेष पदों पर नियुक्ति में देरी से डीएड अभ्यर्थी सड़कों पर उतर आए हैं। अनशन के कई दिनों में 160 से अधिक अभ्यर्थियों की तबीयत बिगड़ चुकी है, कई अस्पताल में भर्ती हैं। हाल ही में अभ्यर्थियों ने शिक्षा मंत्री के बंगले का घेराव भी किया, जहां पेट्रोल लेकर आत्मदाह की कोशिश तक की। कांग्रेस नेता और अन्य भी समर्थन में पहुंचे।
शेष रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की मांग
आमरण अनशन पर बैठे डीएड अभ्यर्थियों की मांग है कि शेष रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति दो, शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन जवाब दो। युवा अपनी जान जोखिम में डालकर हक मांग रहे हैं, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
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