शिक्षक अब फिल्म और डॉक्यूमेंट्री भी बनाएंगे, फिल्म डायरेक्टर दे रहे प्रशिक्षण

रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के शिक्षकों ने सफलता की कहानी के वीडियो और डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के टिप्स राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद में स्कूल शिक्षा विभाग में किए जा रहे विभिन्न नवाचारों के दस्तावेजीकरण के लिए आयोजित दो दिवसीय क्षमता विकास कार्यशाला में सीखे। कार्यशाला में बताया गया कि शिक्षकों को अपनी फिल्म बनाना शुरू करने से पहले थीम और स्क्रिप्ट पर बहुत रिसर्च करना आवश्यक है। क्लाइमेक्स के बिना फिल्म में कोई संदेश या दर्शकों को बांधने की ताकत नहीं रह सकती। कार्याशाला चयनित शिक्षकों को तकनीकी जानकारी देने, क्षमता विकास के लिए मोबाइल का उपयोग कर विभाग के बेहतर प्रयासों का दस्तावेजीकरण कर उनका उपयोग अन्य शालाओं में विस्तार करने, जागरूकता, प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई।

दो दिवसीय कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों को प्रथम दिवस प्री-प्रोडक्शन के तकनीकी पहलुओं पर जानकारी दी गयी। लोकेशन, स्क्रिप्ट, कैमरा एंगल, लाईट, ध्वनि और अन्य तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी गई। दूसने दिन छत्तीसगढ़ी फिल्मों एवं विभिन्न डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के निर्माता और डायरेक्टर द्वारा शिक्षकों के साथ विभिन्न गतिविधियों के कक्षा में प्रशिक्षण के दौरान ही विभिन्न एंगल के शॉट लेकर तकनीकी पहलुओं की जानकारी रोचक ढ़ग से दी गई।

प्रसिद्ध बालीवुड एवं छालीवुड फिल्म निर्माता सतीश जैन द्वारा शिक्षकों को फिल्म की स्क्रिप्ट की ताकत जो दर्शकों को बांधे रखती है, पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जब तक हम अपनी फिल्म में कोई ऐसी बात नहीं डालते जो दर्शकों में उत्सुकता और आगे क्या होगा की जिज्ञासा (सस्पेन्स) बनाकर न रखें। हर फिल्म में चाहे वो दो मिनट की हो या दस मिनट की सबमें एक थीम होना चाहिए। सभी कहानी में एक बेहतर स्पष्ट शुरूआत, बीच का भाग और सुनियोजित अंत होना चाहिए।

युवा फिल्मकार दिव्यराज द्वारा बनाई गई छोटी-छोटी फिल्मों को दिखाकर शिक्षकों को ऐसी अलग-अलग सामाजिक मुद्दों पर फिल्म बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

फिल्म अभिनेता एवं थियेटर आर्टिस्ट क्रान्ति दीक्षित द्वारा वोकेशनल एजुकेशन के मीडिया प्रशिक्षकों के माध्यम से आगे के लिए मेंटरिंग की जिम्मेदारी ली गई।

कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने अनुभव किया कि वे अभी तक बिना किसी तैयार या स्क्रिप्ट लिखे सीधे वीडियों बना लेते थे। प्रशिक्षण में वीडियों निर्माण के विभिन्न तकनीकी पहलुओं की जानकारी से बहुत लाभ मिला है। इस तकनीकी जानकारी के आधार पर शालाओं में जाकर विभिन्न मुद्दों पर सफलता की कहानियां और बेहतर प्रयासों पर वीडियों बनाकर राज्य को उपलब्ध कराया जाएगा। इसे राष्ट्रीय पोर्टल शगुन में अपलोड करने भेजा जाएगा। पोर्टल में अपलोड वीडियों को छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा में हो रहे विभिन्न नवाचारी प्रयासों को साझा किया जा सकेगा।

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