विशेष रिपोर्ट- तीन बार के मुख्यमंत्री रहे रमन सिंह के इलाके का काला सच! 18 गांव के लोगों की दुनिया बनी नर्क, मौत की कगार पर जिंदगियां

विनोद दुबे, रायपुर/ राजनांदगांव। प्रदेश को बने 18 बरस बीत चुके हैं. इन 18 बरसों में छत्तीसगढ़ की तस्वीर भी काफी कुछ बदल चुकी है अगर नहीं बदली तो इन 18 गांवों के लोगों की तकदीर. जिन जनप्रतिनिधियों के आगमन पर इन गांवों के ग्रामीण अपनी पलक-पांवडे़ बिछा कर दौड़ लगा देते थे आज वो दो कदम भी नहीं चल पा रहे हैं. जिन हाथों ने ईवीएम मशीन के बटन को दबाकर अपने और क्षेत्र के विकास के लिए जनप्रतिनिधियों को चुना था उनके वो हाथ आज ज़ख्मों से भरे हुए हैं. उन ग्रामीणों की आंखें आज बेबस और बेउम्मीद हो चुकी है. न तो इन्हें अपनी तकलीफ दूर होने की उम्मीद है और न ही यह उम्मीद है की अब कोई उनकी भी सुध लेगा. हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के उस जिले के लोगों की जिन्होंने अपनी तकदीर संवारने तीन बार अपने ही क्षेत्र से एक विधायक को चुनकर सूबे की राजधानी में मुख्यमंत्री बनाकर भेजा. ये दर्द भरी कहानी और नाउम्मीदी राजनांदगांव जिले के उन 18 गांवों के लोगों की है. ये 18 गांव आर्सेनिक प्रभावित हैं.

इन गांवों में आर्सेनिक युक्त पानी पीने की वजह से हुई लाइलाज बीमारी अब कैंसर में तब्दील हो रही है. इस वजह से पीड़ित लोगों की असमय मौत हो रही है. 20 साल पहले से ही इस समस्या से पीड़ित ग्रामीणों की पीड़ा जब विधान सभा के सदन में गूंजी, तब शासन जागा और उन्हें 2018 में पीने का पानी मुहैया कराया गया, लेकिन पूर्व से पीड़ित लोगों के इलाज के दिशा में कोई पहल नहीं हुई. मजबूर गांव वाले शासन और भगवान को रोते बिलखते कोस रहे हैं. हालांकि कुछ ग्रामीण अब शासन के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं.

सबसे ज्यादा प्रभावित ग्राम कौड़ीकसा पहुंचने पर ज्यादातर पीड़ित लोग सामने आने से अब कतराने लगे हैं क्योंकि ऐसा एक बार नहीं 1000 बार हो चुका है. जब अलग अलग शहरों से मीडिया और रिसर्च की टीम यहां आकर उनसे सवाल जवाब करती रही है. शासन स्तर के अधिकारी यहां आ कर तरह-तरह की बातें की है लेकिन इनके इलाज के लिए कोई ठोस पहल अब तक नहीं हुई. अब ये तिल-तिल कर मौत के करीब जा रहे हैं. कुछ लोग ऐसे हैं जो हिम्मत जुटाकर, घर की संपत्ति बेचकर जीने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, दवाइयों के लिए रायपुर-राजनांदगांव जिला मुख्यालय का चक्कर लगा रहे हैं. कुछ लोग दिल्ली, मुंबई और कोलकाता तक के महंगे अस्पतालों में गए लेकिन वे ठीक नहीं हो पाए.

रोते हुये बोधन ने बताया की अब तो उन्हें केवल मौत का इंतजार है. यही दशा पंचराम, दसरू और युवराज तारम, चतुर साहू और रोहित की भी है. चतुर ने कहा कि कुछ दिनों से पूरे गांव में लोगों को पेट फूलने की बीमारी भी हो रही है, कुछ लोग गैस होने का इलाज करा रहे हैं. यहां जो पानी सप्लाई हो रहा है वह भी कई बार बहुत ही गंदा आता है. सोमेंद्र ने बताया की पानी की सप्लाई विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शुरू हुई है जबकि उनके ही गांव में पीड़ित परिवारों की संख्या 50 से अधिक है. आस-पास के गांव की स्थिति में मूल्यांकन करने पर यह संख्या और भी बढ़ जाएगी. शासन को इस दिशा में कुछ ठोस पहल करनी चाहिए. उन्होंने बताया दो-तीन अलग-अलग देशों के डॉक्टर यहां आए और किसी का नाखून लेकर गए, किसी के शरीर का कुछ हिस्सा लेकर गए, लेकिन आज तक शासन की ओर से उनके इलाज के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई. रिसर्च टीम केवल यह बताती रही है कि आसपास का पानी ठीक नहीं है साफ पानी पीने से ठीक हो जाएगा पर ऐसा हुआ नहीं.

बोरिंग बंद करा बिछाई पाइप लाइन

हालांकि रमन सरकार इन इलाकों में आर्सेनिक युक्त पानी का उपयोग नही होने देने के लिए वहां बोरिंग बंद कर दिए हैं. और मोंगरा बैराज से पाइप लाइन बिछाकर कर पानी सप्लाई की जा रही है. लेकिन फिर भी यहां हालात नहीं बदले है. कुछ गांवों में प्रभाव जरूर कम हुआ लेकिन कुछ गांव ऐसे हैं जहां लोगों की जिंदगी मौत के मुहाने पर आ खड़ी है.

यह है प्रभावित गांव

जिले में 18 गांव आर्सेनिक प्रभावित है. इसमें से पांगरी, भंसुला, हाथीकन्हार, भगवानटोला, अंबागढ़ चौकी, कोटरा, थैलीटोला, सोनसायटोला, मंगाटोला, आतरगांव, बिहरीकला, बिहरीखुर्द, कौड़ीकसा, अरजकुंड, सांगली, तेलीटोला, धातुटोला, जोरातराई व जादूटोला, सोमनी, ईरा, सांकरा, इंदावानी आदि शामिल हैं.

ये हैं पीड़ित

कौड़ीकसा निवासी सुकालू यादव, भगवंतीबाई, सेमलिया धनकर, केशुराम कौशिक, राजा कुंजाम, जीवराखन कोरटिया, प्रेमलाल सिन्हा आदि की मौत हो चुकी है. इसी प्रकार प्रभावितों में पंचराम कोरटिया, पंचराम की पत्नी, फेरु राम धनगर, बोधन मंडावी, राजकुमार ध्रुव, दसरू फ़रदिया, गोपाल फ़रदिया, चमरा राम साहू, चतुर राम साहू, रोहित कौशिक, युवराज तारम जगदीशदेवी कुंजान, दिग्विजय कुंजाम, लक्ष्मी कोर्राम, बबली कुंजाम, चंपा फरदिया, विक्रम पिद्दा आदि शामिल हैं.

ये लड़ेंगे न्यायिक लड़ाई

इन पीड़ित परिवारों की ओर से की ओर से न्यायिक लड़ाई लड़ने की तैयारी चल रही है. उनकी लड़ाई लड़ने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता एवं हाईकोर्ट अधिवक्ता एनडी मानिकपुरी सामने आए हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस से राजनांदगांव लोकसभा सीट से दावेदारी भी किए हैं. शुक्रवार को कौड़िकसा पहुंचकर अधिवक्ता एनडी मानिकपुरी और राजेंद्र जैन ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की. अधिवक्ता  मानिकपुरी ने बताया कि पीड़ित परिवारों के संबंध में तीन बार मुख्यमंत्री रहे डॉ रमन सिंह और उनके सांसद पुत्र अभिषेक सिंह ने कभी ध्यान नहीं दिया. मानपुर मोहला की पूर्व विधायक तेजकुंवर नेताम के द्वारा सदन में मामला उठाए जाने के बाद इन ग्रामीणों को नल जल योजना का लाभ 2018 में मिला, जबकि ये बीते 20 साल से पीड़ित थे. मानिकपुरी का कहना है कि हमारे 7- 8 अधिवक्ताओं की युवा टीम इन की लड़ाई लड़ेगी. दिवंगत परिवारों के परिजनों को मुआवजा और पीड़ित लोगों के इलाज के दिशा में शासन सार्थक कदम उठाए इसलिए उच्च न्यायालय में पीड़ित परिवारों के पक्ष में याचिका लगाएंगें.

राजनांदगाव जिले के सीएचएमओ डॉ मिथलेश चौधरी का कहना है कि प्रभावित इलाकों में अंबागढ़ चौकी और कौड़ीकसा में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है. घर-घर सर्वे करते हैं और जो भी समस्या आती है उसका इलाज करते हैं. लंबे समय से हुआ है. आर्सेनिक का प्रभाव खत्म हो गया है. आर्सेनिक फ्री पानी उन्हें मिल रहा है. हालांकि वे यह नहीं बता पाए कि आर्सेनिक का प्रभाव कब से खत्म हो गया है और सभी इलाकों में आर्सेनिक फ्री पानी की सप्लाई जारी है. आप जो भी बता रहे हैं मैं फिर से एक बार सर्वे करा लेता हूं.

सांसद विधायक और मुखिया रमन

आपको बता दें कि राजनांदगाव जिले से डॉ रमन सिंह सांसद रहने के साथ ही केन्द्र सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. इसके अलावा वे इस जिले से चौथी बार विधायक चुने गए हैं. इस जिले से जीतकर वे लगातार तीन बार प्रदेश के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं. इसके साथ ही उनके पुत्र अभिषेक सिंह साल 2014 में जिले से सांसद चुने गए हैं. इसके बावजूद यहां के ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल आपूर्ति नहीं मिल पाई और आर्सेनिक के जहर से तिल-तिल मरते निराश ग्रामीणों की दुनिया नर्क बन गई है और जिंदगियां मौत की कगार पर आकर खड़ी हो गई हैं.

 

 

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