पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच ED ने ऐसा एक्शन लिया है जिससे सीएम ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ जाएगी. जांच अजेंसी ने कार्रवाई करते हुए I-PAC (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी) के निदेशक और सह-संस्थापक विनेश चंदेल को दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया है. यह वही कंपनी है जिसके कोलकाता दफ्तर पर इसी साल जनवरी में ED की छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद पहुंच गई थीं. उस वक्त मुख्यमंत्री जांच अजेंसी की मोजूदगी में कंपनी की फ़ाइलें लेकर निकल गईं थी. इस घटना ओ लेकर उस समय भारी विवाद खड़ा हुआ था. अधिकारियों ने बताया कि चंदेल को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया था. इससे पहले दिल्ली, बेंगलुरु और मुंबई में कई ठिकानों पर छापेमारी भी हो चुकी है. मामला CBI की 2020 की FIR से जुड़ा है, जिसमें बहु-करोड़ रुपये के कोयला तस्करी घोटाले का आरोप है.
ED ने कहां-कहां की छापेमारी?
दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर और मुंबई में आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व संचार प्रभारी विजय नायर के परिसर पर दो अप्रैल को ईडी द्वारा छापा मारा गया था.
कौन हैं विनेश चंदेल?
विनेश चंदेल I-PAC के प्रमुख चेहरों और संस्थापकों में से एक हैं. प्रशांत किशोर, प्रतीक जैन और ऋषिराज सिंह के साथ मिलकर उन्होंने इस राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म की नींव रखी थी. चंदेल कंपनी के रणनीतिक संचालन के साथ-साथ पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनाव अभियान के प्रबंधन में बेहद अहम भूमिका निभा रहे थे.
क्या है गिरफ्तारी की वजह?
ED का दावा है कि इस कोयला घोटाले से जुड़े हवाला ऑपरेटरों ने I-PAC की कंपनी Indian PAC Consulting Private Limited तक करोड़ों रुपये पहुंचाए. एजेंसी के अनुसार करीब 20 करोड़ रुपये इस नेटवर्क के जरिए I-PAC तक पहुंचे. जांच में यह भी सामने आया है कि इन पैसों को मुंबई की एक अंगड़िया फर्म के जरिए ट्रांसफर किया गया, जो पहले दिल्ली शराब घोटाले की जांच में भी एजेंसियों के रडार पर आ चुकी है. जांच एजेंसी का आरोप है कि कोयला चोरी और तस्करी से जुड़ा करोड़ों रुपये का काला धन ‘हवाला’ ऑपरेटरों के जरिए I-PAC (इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड) के खातों तक पहुंचा था. चुनावों से ठीक पहले, ममता बनर्जी का चुनाव प्रबंधन संभाल रही कंपनी के शीर्ष अधिकारी की इस गिरफ्तारी ने बंगाल की सियासत में बवाल मचना तय है.
दिल्ली, बेंगलुरु-कोलकाता में मारे थे छापे
दिल्ली में चंदेल के परिसर के अलावा, बेंगलुरु में आई-पैक के एक अन्य सह-संस्थापक और निदेशक ऋषि राज सिंह के परिसर और मुंबई में आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व नेता विजय नायर के परिसर पर 2 अप्रैल को ईडी ने छापेमारी की थी. इससे पहले ईडी ने आठ जनवरी को आई-पैक के कार्यालय और इसके संस्थापक और निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित आवास पर छापेमारी की. मामले में तब विवाद शुरू हो गया था जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंच गईं.
क्या है पूरा मामला
ईडी का मामला सीबीआई की नवंबर 2020 की प्राथमिकी पर आधारित है, जिसमें पश्चिम बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयला चोरी घोटाले का आरोप लगाया गया है. ईडी ने एक बयान में कहा था कि इस कथित कोयला तस्करी गिरोह से जुड़े एक हवाला ऑपरेटर ने आई-पैक की पंजीकृत कंपनी इंडियन पीएसी कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड को करोड़ों रुपये के लेनदेन में सुविधा प्रदान की थी.
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