प्रतीक चौहान. रायपुर. राजधानी रायपुर में खाकी का इकबाल खत्म होता नजर आ रहा है. रायपुर रेलवे स्टेशन पर नो-पार्किंग में खड़े वाहनों पर कार्रवाई करने गई ट्रैफिक पुलिस की टीम पर न केवल स्टेशन परिसर में हमला हुआ, बल्कि उपद्रवी भीड़ ने गंज थाने के भीतर घुसकर भी पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की. हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के 10 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं. फिलहाल, पुलिस सीसीटीवी फुटेज और वाहन नंबरों के आधार पर आरोपियों की शिनाख्त करने का दावा कर रही है, लेकिन 10 दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी न होना रायपुर पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है.

क्या है पूरा मामला?
घटना 22 दिसंबर की शाम की है. फाफाडीह ट्रैफिक थाने की टीम क्रेन लेकर रेलवे स्टेशन इलाके में गश्त पर थी. शाम करीब 5:30 बजे स्टेशन के मुख्य द्वार और एटीएम बूथ के पास अवैध रूप से खड़ी मोटरसाइकिलों के कारण जाम की स्थिति बन रही थी. जब आरक्षक मोतीलाल लहरे और उनकी टीम ने इन वाहनों को क्रेन से उठाना शुरू किया, तब 10-15 युवकों की भीड़ वहां पहुंच गई.
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ ने कार्रवाई का विरोध करते हुए आरक्षक मोतीलाल लहरे के साथ धक्का-मुक्की और गाली-गलौज शुरू कर दी. उस वक्त आरपीएफ के जवानों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस जब्त वाहनों को लेकर गंज थाना परिसर पहुंची.
थाने के भीतर भी दुस्साहस
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ. आक्रोशित भीड़, जिसमें कुछ महिलाएं भी शामिल थीं, पुलिस का पीछा करते हुए गंज थाने के भीतर तक पहुंच गई. वहां आरोपियों ने पुलिस पर ही महिलाओं के साथ बदसलूकी का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया. इसी गहमागहमी के बीच भीड़ ने आरक्षक मोतीलाल लहरे पर दोबारा हमला कर दिया और उनके साथ मारपीट की.
रसूख के आगे कार्रवाई सुस्त?
इस मामले में गंज पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 132, 221, 296 और 3(5) के तहत शासकीय कार्य में बाधा और मारपीट का मामला दर्ज किया है. सूत्रों के अनुसार, हमलावरों में एक युवक खुद को पुलिसकर्मी का रिश्तेदार बता रहा था.
चर्चा है कि पुलिस ने जब्त किए गए वाहनों (CG04PW8240, CG04PS5549 आदि) को समन शुल्क लेकर छोड़ दिया है, लेकिन मारपीट करने वाले आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है. पुलिस विभाग के भीतर ही इस ढुलमुल कार्रवाई को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है.
स्टेशन पर जाम हटाने के दौरान कुछ वाहन चालकों ने गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी दी और सीने व पीठ पर मुक्कों से वार किया. थाने पहुंचने पर भी उन्होंने शासकीय कार्य में बाधा डाली.
आरक्षक मोतीलाल लहरे (पीड़ित), लिखित शिकायत के अनुसार


