ईरान में फंसे भारतीय छात्रों को लेकर राहत भरी खबर है। ऐसे छात्रों का पहला बैच शुक्रवार को देश लौट सकता है। बता दें कि सरकार ने भी सलाह दी हुई है कि ईरान की हालात को देखते हुए जितनी जल्दी हो सके, वहां से निकल जाएं। गुरुवार को जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन ने बताया है कि अगर ईरानी अधिकारियों की ओर से क्लीयरेंस मिल जाती है तो वहां रह रहे छात्रों का पहला बैच शुक्रावर को देश लौट सकता है।

शुक्रवार से छात्रों के लौटने की उम्मीद

भारत ने ईरान में मौजूद अपने नागरिकों को सलाह दे रखी है कि जो भी साधन उपलब्ध हो उससे जल्द से जल्द वहां से निकल जाएं। ईरान में इस समय जो भारतीय मौजूद हैं, उनमें छात्र, तीर्थयात्री, कारोबारी और टूरिस्ट सभी शामिल हैं। जम्मू और कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा, ‘हमने ईरान के शिराज,अराक, टीयूएमएस और शहीद बेहेश्ती यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले कश्मीरी सहित कई भारतीय छात्रों से बात की है। उनमें से कइयों ने पहले ही टिकट बुक कर लिया है और उम्मीद है कि कल से वह आने लगेंगे, हालांकि यह हालात और ईरानी सरकार से क्लीयरेंस पर निर्भर है।’

ईरान में फंसे हैं हजारों भारतीय छात्र

ईरान ने कुछ समय के लिए अपना एयरस्पेस बंद करने के बाद इसे फिर से खोल दिया है। उसने अमेरिकी हमलों की आशंका में यह कदम उठाया था। खुएहामी का कहना है कि सुरक्षा जोखिमों, लॉजिस्टिक की दिक्कतों और भरोसेमंद ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन की समस्या के कारण कई छात्रों के लिए खुद से आने का इंतजाम करना मुमकिन नहीं है। इस समय देश के हजारों छात्र ईरान में फंसे हुए हैं,जिनमें जम्मू और कश्मीर के करीब 2,000 मेडिकल छात्र हैं। ये छात्र ईरान सरकार के खिलाफ प्रदर्शन और उनपर हो रही हिंसक कार्रवाई की वजह से वहां फंस गए हैं और अब वापस लौटना चाहते हैं।

ईरान में फंसे छात्रों के परिजन चिंतित

ईरान में बिगड़े हालात की वजह से ऐसे छात्रों के माता-पिता की चिंता बहुत ज्यादा बढ़ी हुई है और वे अपने बच्चों की हिफाजत को लेकर बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। छात्र संगठन का कहना है कि उन्हें सुरक्षित निकाले जाने की उचित व्यवस्था नहीं होने की वजह से यह चिंता और ज्यादा बढ़ गई है।

छात्र संगठन की पीएम मोदी से गुहार

छात्र संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर से अपील की है कि वह तुरंत भारतीय नागरिकों को निकालने के उपाय करें। संगठन के नेता का कहना है, ‘भारत सरकार को एक स्पष्ट इवैक्यूएशन फ्रेमवर्क, डेडिकेटेड इमरजेंसी हेल्पलाइन और सुरक्षित ट्रांजिट कॉरिडोर तैयार करना चाहिए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भारतीय छात्र सुरक्षित, बिना किसी परेशानी के और सम्मान के साथ अपने घर वापस लौट सकें।’

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