महाराष्ट्र के अमरावती जिले में धर्मांतरण के आरोप में आठ लोग गिरफ्तार हुए हैं. गिरफ्तार किए गए लोगों में केरल निवासी एक पादरी और चार महिलाएं शामिल हैं. मामला वरुड तालुका के बेनोडा गांव का है. यहां एक विशेष धर्म से जुड़े कुछ लोगों के गांव में आने के बाद विवाद खड़ा हो गया. आरोप है कि ये लोग ग्रामीणों पर ईसाई धर्म अपनाने का दबाव बना रहे थे और इसके बदले पैसे की पेशकश भी की जा रही थी. अमरावती से 80 किलोमीटर दूर वरुड के निवासी लक्ष्मण शेडे ने मंगलवार को शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार पांच-छह लोग 30 दिसंबर को स्थानीय निवासी रीतेश बोंडरे के घर आए और उनके घर के सामने एक पंडाल लगा दिया. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सफेद कपड़े पहने एक व्यक्ति गांव के लोगों को ईसाई धर्म के बारे में उपदेश देने लगा और धर्मांतरण के लिए पैसे का लालच दिया.

जानकारी के अनुसार मामला अमरावती से करीब 80 किलोमीटर दूर वरुड इलाके का है. वरुड निवासी लक्ष्मण शेडे ने मंगलवार को बेनोडा थाने में शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार, 30 दिसंबर को पांच-छह लोग स्थानीय निवासी रीतेश बोंडरे के घर पहुंचे और उसके सामने एक पंडाल लगाया. आरोप है कि सफेद कपड़े पहने एक व्यक्ति ने गांव के लोगों को ईसाई धर्म के बारे में उपदेश देना शुरू किया और धर्मांतरण के बदले पैसे देने का लालच दिया.

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने “मलयाली ईसाई पादरी, उनके परिवार और सहयोगियों” की गिरफ्तारी को “अत्यंत चिंताजनक” करार दिया और “ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के चिंताजनक चलन” के लिए संघ परिवार की आलोचना की.

शिकायत मिलते ही बेनोडा थाने के प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और वहां मौजूद लोगों से पूछताछ की. इसके बाद आठ लोगों को थाने लाया गया. पुलिस ने जिन आरोपियों की पहचान की है, उनमें रीतेश बोंडरे, आनंदकुमार कर्री, सुधीर विलियम, विक्रम सांडे और चार महिलाएं शामिल हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुधीर विलियम केरल का निवासी है और एक पादरी बताया जा रहा है. बुधवार को पुलिस ने आठ आरोपियों को औपचारिक रूप से गिरफ्तार करके स्थानीय अदालत में पेश किया, जिसने उन्हें जमानत दे दी. आरोपियों के खिलाफ धार्मिक भावनाओं को आहत करने समेत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “नागपुर में जबरन धर्मांतरण के आरोप में एक मलयाली ईसाई पादरी, उनके परिवार और सहयोगियों की गिरफ्तारी बेहद चिंताजनक है. यह घटना ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने के लिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के संघ परिवार के चिंताजनक चलन को उजागर करती है. इससे पहले जबलपुर में भी ऐसा हुआ था. ऐसे कृत्य संवैधानिक स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाते हैं.”

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