पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने बड़ा फैसला किया है. उन्होंने कहा है कि अब वो अपने आधिकारिक पत्राचार में ‘भवदीय’ की जगह ‘वंदे मातरम्’ लिखेंगे. इसके साथ ही उन्होंने सभी लोगों से गुजारिश की कि वो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस मशहूर रचना अपनी रोजाना गतिविधियों में शामिल करें. राज्यपाल के अनुसार, ऐसे प्रयास गीत से जुड़ी एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव के मूल्यों को बरकरार रखने में सहायक होंगे. लोक भवन के आधिकारिक सोशल मीडिया के जरिए से इस फैसले को शेयर करते हुए, एक अधिकारी ने कहा कि यह कदम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित वंदे मातरम् की चिरस्थायी विरासत और सांस्कृतिक महत्व से प्रेरित है.

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने अपने आधिकारिक पत्राचार में ‘भवदीय’ के स्थान पर ‘वंदे मातरम्’ लिखने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है. उन्होंने यह कदम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस मशहूर रचना से जुड़ी एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव के मूल्यों को बनाए रखने के लिए उठाया है.

जानकारी के मुताबिक बुधवार (14 जनवरी) को राज्यपाल ने कहा कि वह अपने आधिकारिक पत्राचार में परंपरागत रूप से प्रयुक्त होने वाले ‘भवदीय’ के स्थान पर ‘वंदे मातरम्’ लिखेंगे. अधिकारी ने कहा कि राज्यपाल ने अपने पत्रों के आखिर में ‘भवदीय’ की जगह पर ‘वंदे मातरम्’ लिखने का निर्णय लिया है. इसके साथ ही उन्होंने सभी से आग्रह किया कि वो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की इस प्रतिष्ठित रचना के प्रति श्रद्धा के प्रतीक के रूप में ‘वंदे मातरम्’ को अपने जीवन और दैनिक गतिविधियों में यथासंभव शामिल और आत्मसात करें.

वंदे मातरम गीत की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने कुछ दिन पहले देशभक्ति और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया था. उन्होंने कहा था कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह देश भक्ति, विविधता में एकता और मातृभूमि के लिए काम करने की प्रेरणा देता है.

राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा था ‘मैं वंदे मातरम के माध्यम से लोगों में देशभक्ति, सामाजिक सद्भाव और मातृभूमि के लिए समर्पण की भावना जगाना चाहता हूं. यह गीत हमें याद दिलाता है कि हम सभी को अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश की प्रगति और सुरक्षा में योगदान देना चाहिए’.

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