भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण टिप्पणी सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों में गंभीर खामियां बताते हुए इन्हें सी ग्रेड में रखा है, जो आंकड़ों की गुणवत्ता के लिहाज से दूसरा सबसे निचला स्तर माना जाता है। यह मूल्यांकन ऐसे समय में आया है, जब सरकार आज वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी करने जा रही है। अनुमान है कि अर्थव्यवस्था सात प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है।

विपक्ष ने खड़े किए सवाल

अब विपक्षी पार्टियां IMF की रिपोर्ट का हवाला देकर सवाल उठा रही हैं। कह रही हैं कि GDP ग्रोथ के आंकड़े भरोसेमंद नहीं हैं। यहां गौर करने वाली एक बात ये भी है कि 2024 में पाकिस्तान की इकोनॉमी को लेकर जो रिपोर्ट आई थी, उसमें हमारे पड़ोसी देश को भी C ग्रेड मिला था। यानी, IMF मानता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के आधिकारिक आंकड़ों में एक जैसी कमियां हैं।

क्या कमी रह गई ?

आईएमएफ के वार्षिक मूल्यांकन के अनुसार भारत के राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों में जीडीपी और जीवीए जैसे प्रमुख संकेतक शामिल हैं। इसमें पद्धतिगत कमियां मौजूद हैं। संस्था का कहना है कि आंकड़े पर्याप्त आवृत्ति और समय पर उपलब्ध होते हैं, लेकिन कार्यप्रणाली संबंधी कमजोरियां आर्थिक निगरानी की गुणवत्ता को कुछ हद तक प्रभावित करती हैं। इसी आधार पर राष्ट्रीय लेखा प्रणाली को सी ग्रेड दिया गया है।

आधार वर्ष और पद्धति पर सवाल

आईएमएफ ने 2011-12 के पुराने आधार वर्ष पर भी सवाल उठाया, जिस पर मौजूदा आर्थिक गणनाएं आधारित हैं। रिपोर्ट में थोक मूल्य सूचकांक के उपयोग और जीडीपी को मापने के उत्पादन व खर्च आधारित दृष्टिकोणों में समय-समय पर सामने आने वाली विसंगतियों को प्रमुख समस्या बताया गया। संस्था ने खर्च आधारित आंकड़ों और अनौपचारिक क्षेत्र के कवरेज को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

भारत का आय आधारित मॉडल

भारत सरकार लंबे समय से आय आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से जीडीपी का अनुमान लगाती है। इस मॉडल में सरकार, उद्योगों और लोगों की आय के आधार पर सकल घरेलू उत्पाद निकाला जाता है। सरकार खर्च आधारित मॉडल के अनुमान भी प्रस्तुत करती है, लेकिन दोनों में अक्सर अंतर देखने को मिलता है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि विभिन्न स्रोतों और कवरेज के अंतर के कारण यह विसंगति पैदा होती है।

सीपीआई और अन्य आंकड़ों में सुधार की जरूरत

आईएमएफ ने कहा कि तिमाही राष्ट्रीय लेखा प्रणाली में मौसमी रूप से समायोजित आंकड़ों का अभाव है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। वहीं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) को बी ग्रेड दिया गया है। संस्था के अनुसार यह सूचकांक महीने में एक बार जारी होने के कारण निगरानी के लिए उपयोगी है, लेकिन इसका आधार वर्ष पुराना होने के कारण वर्तमान उपभोग पैटर्न को सही तरीके से प्रतिबिंबित नहीं कर पाता।

कुल मिलाकर, आईएमएफ ने भारत को सभी आंकड़ा श्रेणियों में बी ग्रेड दिया है। संस्था का कहना है कि भारत के आंकड़े बड़े पैमाने पर पर्याप्त हैं, लेकिन कई जगह तकनीकी और कार्यप्रणालीगत सुधार की आवश्यकता है। आज जारी होने वाले तिमाही जीडीपी आंकड़े इन बहसों के बीच आने वाले आर्थिक रुझानों की दिशा तय करेंगे।

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