इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद दिल्ली सरकार सतर्क हो गई है। राजधानी में ऐसी कोई घटना न हो, इसके लिए जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को संवेदनशील इलाकों में पानी की जांच और निगरानी बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए हैं। जल मंत्री ने इस संबंध में एक चेकलिस्ट जारी की है, जिसमें मुख्य निर्देश सीवर लाइनों के पास से गुजरने वाली पानी की पाइपलाइनों की बारीकी से जांच। पानी की गुणवत्ता (क्वालिटी) जांच प्रणाली को और बेहतर बनाना। पुरानी और खराब पाइपलाइन वाले इलाकों की पहचान करना। पाइपलाइन में खराबी पाए जाने पर मरम्मत को प्राथमिकता देना।

दिल्ली में अधिकारियों को ये निर्देश

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कौशल राज शर्मा ने कर्मचारियों और इंजीनियरों को निर्देश दिए हैं कि पानी की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के सभी आदेशों का सख्ती से पालन किया जाए। आदेश न मानने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

अधिक कर्मचारियों की तैनाती: पानी के नमूने (सैंपल) इकट्ठा करने के लिए।

अतिरिक्त वाहन: पानी की समस्या वाले इलाकों और सार्वजनिक स्थानों से बड़े पैमाने पर सैंपल लेने के लिए।

जल शिकायत निवारण: सभी डिवीजनों को निर्देश कि पानी से जुड़ी शिकायतें दो दिनों के भीतर सुलझाई जाएं।

प्रदूषण रोकथाम: सीवर लाइनों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए 30 सुपर-सकर और 16 रिसाइकलर मशीनें लगाई जाएंगी।

डेटा निगरानी: पानी की समस्याओं और उनके समाधान का डेटा रोजाना इकट्ठा किया जाएगा।

विशेष सेल का गठन: पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए एक अलग विभाग बनाया जाएगा।

इस महीने की शुरुआत में इंदौर के भागीरथपुरा में सीवर का पानी पीने से कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई थी। इस दुखद घटना ने दिल्ली की जल सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली का पानी सप्लाई नेटवर्क काफी पुराना है: इसका लगभग 18% हिस्सा 30 साल से भी ज्यादा पुराना है, और इसे बदलने की सख्त जरूरत है।

कहां कमजोर है मामला?

दिल्ली सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को अपने पूरे सिस्टम की संपूर्ण जांच करने के निर्देश दिए हैं, ताकि उन कमजोर हिस्सों की पहचान हो सके जहां से गंदा पानी या बाहरी प्रदूषण पीने के पानी में मिल सकता है। ऐसी जगहों की मरम्मत और पाइपलाइन बदलने को प्राथमिकता दी जाएगी।

दिल्ली में जल वितरण का ढांचा इस प्रकार है 9 वाटर ट्रीटमेंट प्लांट पूरे शहर में काम करते हैं। 123 भूमिगत जलाशय (UGRs) और 15,600 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से रोजाना लगभग 1,000 मिलियन गैलन (MGD) पानी सप्लाई किया जाता है। सरकार ने घनी आबादी वाले इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी रखने और सभी ट्रीटमेंट प्लांट के साथ-साथ सीधे उपभोक्ताओं तक सुरक्षित पानी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

दिल्ली जल बोर्ड (DJB) को निर्देश दिए गए हैं कि वह सिस्टम की टेस्टिंग और मॉनिटरिंग को और मजबूत करे। जल बोर्ड के आकलन के मुताबिक, 15,600 किलोमीटर लंबे पानी के नेटवर्क का लगभग 18% हिस्सा (2,800 किलोमीटर) 30 साल से अधिक पुराना है, जिसे तुरंत बदलने की जरूरत है। पुरानी पाइपलाइन में दरारें और लीकेज होने का खतरा अधिक रहता है, जिससे पानी दूषित हो सकता है। दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, शहर के अलग-अलग हिस्सों से लिए गए 7,129 नमूनों में से 100 जगहों के सैंपल असंतोषजनक पाए गए। खास चिंता की बात यह है कि इनमें से कुछ खराब सैंपल सीधे भूमिगत जलाशयों (UGRs) और बूस्टर पंपिंग स्टेशनों से लिए गए थे।

दिल्ली में पानी की गुणवत्ता जांच प्रणाली को लेकर हाल ही में कई गंभीर चिंताएं उठी हैं। DJB की 25 वाटर क्वालिटी टेस्टिंग लैब के पास NABL मान्यता नहीं है, जिससे जांच की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं। जांच के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तरीके और तकनीकें पुरानी (Obsolete) हो चुकी हैं। NGOs और अन्य पक्षों ने सरकार से वर्तमान मॉनिटरिंग सिस्टम की स्वतंत्र समीक्षा कराने की अपील की है। अनुरोध किया गया है कि ‘जल जीवन मिशन’ के दिशा-निर्देशों के अनुसार एक स्वतंत्र जल गुणवत्ता सचिवालय बनाया जाए। दूषित पानी की समस्या से निपटने के लिए नए और सख्त गाइडलाइंस जारी करने की मांग भी की गई है।

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