लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा कि सोनम वांगचुक ने युवाओं को भड़काने और देश के खिलाफ सोच फैलाने की कोशिश की है, इसलिए उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया।

देश को बांटने वाली भाषा का कर रहे थे प्रयोग

केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वांगचुक अपने भाषणों में केंद्र सरकार को ‘वे’ कह रहे थे। सरकार का कहना है कि ‘हम और वे’ जैसी भाषा देश को बांटने वाली होती है। उनके मुताबिक, यही बात NSA लगाने के लिए काफी है।

हिंसा को बढ़ावा देने वाले बयान

सरकार ने यह भी आरोप लगाया कि वांगचुक ने युवाओं, खासकर GenZ को भड़काया और कहा कि लद्दाख में नेपाल और बांग्लादेश जैसे हालात बनाए जाने चाहिए। सरकार ने कहा कि उन्होंने अपने भाषणों में आत्मदाह जैसी बातों का जिक्र किया, जो हिंसा को बढ़ावा देने वाला है।

देश की सुरक्षा के लिए बहुत अहम इलाका है लद्दाख

तुषार मेहता ने कहा कि लद्दाख देश की सुरक्षा के लिए बहुत अहम इलाका है, क्योंकि यहां से सेना को सप्लाई जाती है। ऐसे में वहां अलगाव की बातें करना देश के लिए खतरा हो सकता है। सरकार ने बताया कि वांगचुक ने कुछ मौकों पर जनमत संग्रह यानी लोगों से अलग फैसला कराने जैसी बातें भी कही थीं।

कल फिर होनी है मामले की सुनवाई

वहीं, सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि उनके पति ने सिर्फ अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध करने का हक इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि सरकार की आलोचना करना किसी भी नागरिक का अधिकार है और इसके लिए जेल में डालना गलत है। मंगलवार को भी इस मामले में सुनवाई जारी रहेगी।

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