वैदिक ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा को शुभ ग्रह माना जाता है, लेकिन जब यह अपनी नीच राशि में होता है तो इसका प्रभाव कुछ राशियों के जीवन में उतार-चढ़ाव ला सकता है. 9 मार्च को सुबह 9.30 मिनट पर चंद्रमा तुला राशि से निकलकर वृश्चिक राशि में गोचर शुरू कर चुके हैं. जिसे चंद्रमा की नीच राशि माना जाता है. ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा लगभग 54 घंटे यानी सवा दो दिन तक एक राशि में रहते हैं. इस दौरान संवेदनशीलता और आत्मचिंतन की प्रवृत्ति बढ़ सकती है. 11 मार्च की रात को चंद्रमा वृश्चिक से निकलकर धनु राशि में प्रवेश करेंगे.

वैदिक ज्योतिष में हर ग्रह की एक उच्च और एक नीच राशि मानी जाती है. चंद्रमा की उच्च राशि वृषभ और नीच राशि वृश्चिक है. चंद्रमा मन, भावनाओं, अंतर्ज्ञान और जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है. यह शीतल, सौम्य और पोषक ग्रह माना जाता है, जो मानसिक स्थिरता और शांति का प्रतीक है. वहीं वृश्चिक राशि मंगल की राशि है, जिसकी प्रकृति उग्र, तीव्र और परिवर्तनकारी मानी जाती है. यह जल तत्व की स्थिर राशि है, लेकिन इसका स्वभाव रहस्यमयी और गहरे भावनात्मक उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है. ज्योतिषीय दृष्टिकोण से यह गोचर विशेष रूप से मेष, मिथुन और धनु राशि के जातकों के लिए चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है.
मेष राशि
चंद्रमा का गोचर अष्टम भाव में होगा. जिसे अनिश्चितता का भाव माना जाता है. बनते काम बिगड़ सकते हैं. इसलिए सतर्कता जरूरी है. गलत संगति से धन-समय की हानि संभव है. निवेश से बचें.
मिथुन राशि
चंद्रमा छठे भाव में रहेगा. जिससे शत्रु पक्ष सक्रिय हो सकता है. कार्यस्थल पर सहकर्मियों से नोक-झोंक की आशंका है. लेनदेन में सावधानी रखें. लोगों से बात करते समय शब्दों का चयन सोच-समझकर करें.
धनु राशि
चंद्रमा द्वादश भाव में गोचर करेगा. इस दौरान मानसिक तनाव और आलस्य बढ़ सकता है. आर्थिक मामलों में सावधानी रखें. किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें. योग-ध्यान से स्थिति संतुलित रखें.
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