राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे यमुना की स्थानीय मछलियों को बचाने के लिए केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र (CICFRI) की सिफारिशों को तुरंत लागू करें। अदालत ने दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित विभागों को यमुना के किनारे सीवर सफाई प्लांट लगाने और उन्हें ठीक से संचालित करने का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य है कि नदी का पानी मछलियों और अन्य जलीय जीवों के जीवन के लिए सुरक्षित और रहने लायक बना रहे।
खुद लिया था संज्ञान
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) उस मामले की सुनवाई कर रहा था, जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लिया था। इस रिपोर्ट में प्रयागराज के एक सरकारी सर्वे का हवाला दिया गया था, जिसमें कहा गया कि यमुना नदी में भारत की मछली प्रजातियों की संख्या में कमी आई है। यह सर्वे ICAR-CIFRI (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य पालन अनुसंधान केंद्र) ने किया था। एनजीटी ने इस कमी के गंभीर असर को देखते हुए, सरकारों को संबंधित सिफारिशें लागू करने और नदी के संरक्षण के उपाय करने के निर्देश दिए हैं।
भारतीय मछलियों की संख्या घटी
ICAR-CIFRI द्वारा किए गए सर्वेक्षण के अनुसार, यमुना नदी में कई भारतीय मछली प्रजातियों की संख्या में गिरावट आई है। इनमें प्रमुख हैं: कतला, रोहू, नयन, पब्दा, गोच, चीतल, टेंगरा, रीठा, बाम और महाशीर।वहीं, इसके विपरीत, कुछ विदेशी मछलियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इनमें शामिल हैं: कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, बिग हेड, थाई मांगुर, ग्रास कार्प, तिलापिया, क्रोकोडाइल फिश और बास।
सुधार कार्यक्रमों को जमीन पर लागू करने की जरूरत
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल ने 29 जनवरी को कहा कि यमुना नदी में प्रदूषण के कारण भारतीय मछलियों की संख्या लगातार घट रही है। एनजीटी ने यह भी बताया कि कई संस्थाओं ने पहले इन मछलियों को बचाने के प्रयास किए हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी संख्या घटती जा रही है। इस वजह से एनजीटी ने सुधार कार्यक्रमों की पुनः जांच और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया, ताकि इन्हें जमीन पर सही तरीके से लागू किया जा सके और भारतीय मछलियों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
क्या सुझाव?
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने स्थानीय सरकारों को निर्देश दिया है कि वे ICAR-CIFRI प्रयागराज की सलाहों को मानें और उन्हें जमीन पर प्रभावी ढंग से लागू करें। अवैध मछली पकड़ने के उपकरणों पर रोक लगाना। मछली पकड़ने की पाबंदी के दौरान कड़ी निगरानी रखना। मछली पालन के सही तरीके अपनाना और विशेष क्षेत्रों में मछलियों को पालना। मछली पकड़ने का सही रिकॉर्ड रखना, ताकि मछलियों की संख्या और संरक्षण पर निगरानी बनी रहे। एनजीटी का कहना है कि इन उपायों को लागू करने से यमुना में भारतीय मछलियों की संख्या में सुधार संभव है और नदी का जैविक संतुलन भी सुरक्षित रहेगा।
इन राज्यों को आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकारों को निर्देश दिया है कि वे ICAR-CIFRI की सिफारिशों को तुरंत लागू करें। मछली पालन के नियमों का कड़ाई से पालन करना। नदियों में विदेशी मछलियों को छोड़ने पर रोक लगाना। जनता को जागरूक करना ताकि जलीय जीवन का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। नदी में पानी का प्राकृतिक बहाव बनाए रखना और गंदगी तथा प्रदूषण रोकने के लिए ठोस कदम उठाना। एनजीटी ने स्पष्ट किया कि इन उपायों को लागू करने से यमुना में भारतीय मछलियों का संरक्षण, नदी का जैविक संतुलन और सुरक्षित जलीय पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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