दिल्ली में प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और बढ़ती जनसंख्या के साथ सुचारु कामकाज सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने राजस्व विभाग में 272 नए पद सृजित करने की मंजूरी दी है। राजस्व विभाग में नए पदों का सृजन खासतौर पर राजधानी में हाल ही में बनाए गए नए जिलों और उप-प्रभागों को सुचारु रूप से चलाने के उद्देश्य से किया गया है।
इस निर्णय के पीछे मुख्य उद्देश्य हैं:
नई जिलों और उप-प्रभागों का संचालन: हाल ही में बनाए गए नए जिलों और उप-प्रभागों में प्रशासनिक कामकाज को व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से चलाना।
कर्मचारी संख्या में वृद्धि: राजस्व संग्रह, भूमि प्रबंधन और अन्य प्रशासनिक कार्यों को समय पर पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टाफ की उपलब्धता।
सुविधाओं का बेहतर वितरण: नागरिकों के लिए प्रमाण पत्र, पंजीकरण और भूमि से जुड़े अन्य कार्यों को सुगम बनाना।
प्रशासनिक दबाव कम करना: पुराने कर्मचारियों पर कार्यभार कम करना और विभागीय प्रक्रियाओं में तेजी लाना।
दिल्ली के राजस्व विभाग में प्रशासनिक क्षमता बढ़ाने और नए जिलों तथा उप-प्रभागों को सुचारु रूप से चलाने के लिए 272 नए पदों का सृजन किया गया है। इस नए सृजन के विवरण इस प्रकार हैं:
जिलाधिकारी (DM): 2 पद
अतिरिक्त जिलाधिकारी (ADM): 2 पद
उपजिलाधिकारी (SDM): 8 पद
सब-रजिस्ट्रार: 6 पद
तहसीलदार: 16 पद
नायब तहसीलदार: 22 पद
वरिष्ठ सहायक: 42 पद
कनिष्ठ सहायक: 42 पद
मल्टी टास्किंग स्टाफ (MTS): 52 पद
लेखा, योजना, DSS और स्टेनो कैडर: कई पद
पहले राजस्व विभाग में 11 जिलों के लिए कुल 1553 स्वीकृत पद थे। नए दो जिलों के गठन के बाद अब जिलों की संख्या 13 हो गई है। 272 नए पदों के जुड़ने के बाद कुल स्वीकृत पदों की संख्या 1825 हो गई है।
राजस्व जिलों के पुनर्गठन को दिल्ली सरकार ने दी थी मंजूरी
दिल्ली सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को कैबिनेट निर्णय संख्या 3280 के तहत राजधानी में राजस्व जिलों के पुनर्गठन को मंजूरी दी थी। इस निर्णय के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं. जिलों की संख्या में वृद्धि: पहले 11 जिले थे, जिन्हें बढ़ाकर 13 जिले किया गया। उप-प्रभागों की संख्या में वृद्धि: उप-प्रभागों की संख्या 33 से बढ़ाकर 39 कर दी गई। सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों की स्थापना: नए प्रशासनिक ढांचे के तहत 39 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय स्थापित किए गए। राजस्व जिलों को एमसीडी जोन, एनडीएमसी और कैंटोनमेंट बोर्ड की सीमाओं के अनुरूप बनाना। प्रशासनिक कामकाज में तालमेल और समन्वय सुनिश्चित करना। नागरिकों को सेवाएँ पहुँचाने और भूमि व पंजीकरण कार्यों को अधिक प्रभावी बनाना। इस पुनर्गठन से राजधानी में प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित और आधुनिक बनाने में मदद मिली है, जिससे नए जिलों और उप-प्रभागों में कामकाज की गति और गुणवत्ता बढ़ सके।
जनता से सीधे जुड़ा हुआ है राजस्व विभाग
राजस्व विभाग वास्तव में दिल्ली सरकार का वह विभाग है जो सीधे आम जनता से जुड़ा होता है और शहर के रोज़मर्रा प्रशासन में एक केंद्रीय भूमिका निभाता है। इसके जिम्मेदारियों में शामिल हैं: जमीन से जुड़े रिकॉर्ड का रखरखाव। संपत्ति और भूमि का पंजीकरण। आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र। आपदा प्रबंधन में सक्रिय भूमिका। चुनाव ड्यूटी और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन:
विभिन्न सामाजिक और विकासात्मक योजनाओं का स्थानीय स्तर पर संचालन। हाल के वर्षों में काम का बोझ काफी बढ़ गया है, खासकर नए कानून बीएनएसएस 2023 के लागू होने के बाद, जिससे न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की संख्या और बढ़ गई है। उपराज्यपाल की मंजूरी से यह उम्मीद जताई जा रही है कि राजस्व विभाग में कर्मचारियों की कमी जमीनी स्तर पर दूर होगी। इसका लाभ आम जनता और प्रशासन दोनों को मिलेगा
सुविधाओं में तेजी: नागरिकों को अपने काम के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
प्रशासन और जनता के बीच दूरी कम होगी: ज्यादा स्टाफ होने से लोगों को सरकारी सेवाओं तक आसान और त्वरित पहुँच मिलेगी।
कामकाज में पारदर्शिता और गति: पर्याप्त कर्मचारियों की उपलब्धता से प्रक्रियाओं में देरी कम होगी और निर्णय अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होंगे।
समग्र प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी: नए पदों के जुड़ने से राजस्व विभाग के कामकाज में संतुलन और व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित होगा।
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