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रायपुर। सरकारी जमीन पर यदि कोई गरीब अपना सर छिपाने के लिए एक छोटी सी झोपड़ी भी बना लेता है तो सरकारी अमला उसे ढ़हाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ता लेकिन जब बात रसूखदारों की आती है तो जिम्मेदारों के हाथ-पांव फूलने लगते हैं। न नियम आड़े आते हैं न कोई कानून और न ही किसी की इच्छा शक्ति की कोई कार्रवाई ही कर दे।

ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ में आया है जहां प्रदेश की भाजपा सरकार में नंबर दो की हैसियत रखने वाले मंत्री बृजमोहन अग्रवाल की पत्नि सरिता अग्रवाल, वन विभाग की जमीन पर अपने लिए आलिशान रिसॉर्ट बनवा रही हैं। मंत्री के आगे बेबस विभाग ने कार्रवाई से हाथ खड़े कर दिए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक बृजमोहन अग्रवाल की पत्नि सरिता अग्रवाल और उनके पुत्र महासमुंद जिले के सिरपुर में 4.12 एकड़ जमीन पर श्याम वाटिका नाम से रिसार्ट बनवा रही हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए अग्रवाल की पत्नी के अलावा बेटे ने भी जमीन खरीदी है। आदित्य सृजन प्राइवेट लिमिटेड और पुरबासा वाणिज्य प्राइवेट लिमिटेड ने इसी प्रोजेक्ट के लिए जमीन खरीदी है। कंपनी रिजस्ट्रार के दस्तावेज के मुताबिक आदित्य सृजन के डायरेक्टर सरिता अग्रवाल और अभिषेक अग्रवाल हैं और पुरबासा वाणिज्य के एक डायरेक्टर अभिषेक अग्रवाल हैं।

ये जमीन 2009 में खरीदी गई, रमन सरकार के कई अधिकारियों ने इस पर आपत्ति भी की थी, हाल ही में 30 जून को भी इस पर आपत्ति जताई गई लेकिन सविता अग्रवाल के पति के मंत्रालय ने लिखित रुप में कहा की इस मामले में “कोई कार्रवाई करना संभव नहीं ।”

जिस दौरान यह जमीन सरिता अग्रवाल ने खरीदी उस दौरान उनके पति बृजमोहन अग्रवाल पर्यटन और संस्कृति मंत्री थे। उनके मंत्रालय ने इस इलाके को विशेष पर्यटक क्षेत्र के रुप में चिन्हित किया।

दस्तावेजों में यह बात साफ तौर पर बताई गई है कि  दो मार्च 1994 को स्थानीय झलकी गांव के पांच अन्य किसानों के साथ ही विष्णु राम साहू ने अपनी 4.12 एकड़ जमीन जल संसाधन मंत्रालय को “दानपत्र” के रूप में दे दी गई थी । “दानपत्र” व्यवस्था के चलते  कोई व्यक्ति अपनी जमीन सरकार को अगर सार्वजनिक हित  के तौर पर “दान” कर सकता है। वहीं, इसके कुछ ही समय बाद करीब 61.729 एकड़ के भूभाग के इस अंश को वन विभाग को सौंप दिया गया।

 

दस्तावेज के मुताबिक केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय ने जमीन के स्थानांतरण को दो मई 1994 को प्राथमिक मंजूरी दी थी।  करीब नौ साल बाद इस जमीन पर 22.90 लाख रुपये खर्च करके हरित कार्य करवाया गया था। जमीन पर पशुओं से बचने के लिए खंदकें भी बनवाई गईं। इसके बाद केंद्रीय मंत्रालय ने 17 दिसंबर 2003 को जमीन के स्थानांतरण को अंतिम मंजूरी दे दी। इंडियन एक्सप्रेस के पास मौजूद जमीन रजिस्ट्री रिकॉर्ड के अनुसार सरिता अग्रवाल ने खसरा संख्या 1.38, 1.37 और 1.37 की कुल 4.12 एकड़ जमीन 12 सितंबर 2009 को 5 लाख 30 हजार 600 रुपये में खरीदी।

उधर इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने कहा है कि उन्हें इसकी जानकारी मिली है और उन्होंने चीफ सक्रेटरी से इस मामले की तत्थायात्मक जानकारी मांगी है।