कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत आ रहे हैं. उनके इस दौरे से दोनों देशों के बीच रिश्तों का नया अध्याय शुरू होगा. तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में भारत और कनाडा के बीच जो खटास आई थी, कार्नी उसे मिटाने आ रहे हैं. 26 फरवरी से उनका भारत दौरा शुरू हो रहा है. दोनों देश अब कूटनीतिक कड़वाहट को भूलकर आर्थिक फायदों पर फोकस बढ़ा रहे हैं. इस यात्रा के दौरान कार्नी व्यापारिक समझौते पर मुहर लगाएंगे. ये दौरा ऐसे वक्त में हो रहा है, जब पूरी दुनिया की ट्रेड, इकोनॉमी में उथल-पुथल मची हुई है.
भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में मजबूती आ रही है. कनाडाई पीएम के दौरे से दोनों देशों के बीच न केवल कूटनीतिक संबंध मजबूत होंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच ट्रेड पार्टनरशिप बढ़ेगी. ऐसे में कनाडाई पीएम का भारत दौरा दोनों देशों के बीच के संबंधों को ‘रीसेट’ करेगा.
कार्नी के भारत दौरे की शुरुआत मुंबई में बिजनेस लीडर्स के साथ मुलाकात से होगी. भारत और कनाडा के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए ये बैठक अहम मानी जा रही है. मुंबई के बाद कार्नी नई दिल्ली का रूख करेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से होगी. दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय व्यापार और ट्रेड डील पर चर्चा होगी.
दोनों देशों के बीच बाइलेटरल ट्रेड की बात करें तो साल 2025 में दोनों देशों के बीच दोतरफा व्यापार 11.09 अरब डॉलर का रहा. दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से ट्रेड में कमी आई. हालांकि अब दोनों ही देश इसे बढ़ाना चाहते हैं. भारत-कनाडा ने व्यापार को साल 2030 तक बढ़ाकर 70 अरब डॉलर पर पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है.
भारत और कनाडा के बीच कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (CEPA) पर औपचारिक चर्चा शुरू हो रही है. साल 2010 में शुरू हुई ये चर्चा कई बार रूकी. अगर दोनों देशों के बीच यह डील हो जाती है तो उनका द्विपक्षीय कारोबार बढ़ जाएगा. भारत-कनाडा के बीच गुड्स एंड सर्विसेज, इंवेस्टमेंट, एग्रीकल्चर, डिजिटल कॉर्मस , मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इंपोर्ट टैक्स कम हो जाएगा.
भारत से कनाडा को निर्यात- दवाइयां और फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स जैसे ऑटो पार्ट्स, विमान पार्ट्स और मशीनरी, जूलरी, हीरे, कीमती पत्थर, टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स, रसायन, समुद्री प्रोडक्ट्स
कनाडा से भारत को इंपोर्ट– दालें और एंग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स, मिनिरल्स, खाद, लकड़ी , अखबारी कागज, लोहे और इस्पात, औद्योगिक रसायन
दोनों देशों के बीच CEPA समझौता से कारोबार आसान हो जाएगा, निवेश बढ़ेगा, इंपोर्ट-एक्सपोर्ट बढ़ेगा. अगर दोनों देशों के बीच ये डील हो जाती है तो एक साल में ये भारत की छठी ट्रेड डील होगी. ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड , यूरोपीय यूनियन, अमेरिका के बाद कनाडा छठा देश होगा, जिसके साथ भारत ट्रेड डील करेगा.
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