अजयारविंद नामदेव, शहडोल। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय शहडोल में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ एक गंभीर शिकायत सामने आई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि RTO कार्यालय का कामकाज अब सरकारी दफ्तर में नहीं, बल्कि शहर के होटल अमन से संचालित किया जा रहा है। शिकायतकर्ता विनय सिंह ने कमिश्नर और परिवहन विभाग को दिए पत्र में कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए हैं।
उच्च न्यायालय और परिवहन सचिव के आदेश दरकिनार
शहडोल जिले के बाणगंगा कालोनी के रहने वाले विनय सिंह ने शहडोल कमिश्नर से शिकायत की है कि क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी शहडोल द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर और परिवहन सचिव भोपाल के आदेशों को दरकिनार करते हुए लगातार अस्थायी अनुज्ञा पत्र जारी कर रहे हैं। जबकि आदेशों में स्पष्ट रूप से इन पर रोक लगाई गई है। आरोप है कि अस्थायी अनुज्ञा पत्रों का समय मनमाने तरीके से बदल दिया जाता है, जिससे स्थायी अनुज्ञा पत्र धारकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
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इतना ही नहीं, शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि वाहन स्वामियों से मोटी रकम लेकर अस्थायी अनुज्ञा पत्र स्वीकृत किए जा रहे हैं। जब कोई वाहन मालिक शुल्क जमा कर अधिकृत नकल मांगता है तो न केवल उसे टाला जाता है बल्कि किसी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं की जाती।
पूरा काम होटल अमन से संचालित
सबसे गंभीर आरोप यह है कि परिवहन अधिकारी कार्यालय में मौजूद नहीं रहतीं और पूरा काम होटल अमन से संचालित किया जाता है। शिकायतकर्ता का कहना है कि RTO ने कुछ निजी युवकों को फाइल लाने-ले जाने का काम दे रखा है, जिससे पूरा दफ्तर अघोषित निजी कार्यालय में बदल चुका है। वाहन मालिकों का कहना है कि सरकारी कार्यालय में घंटों चक्कर लगाने के बावजूद अधिकारी मिलती नहीं, लेकिन होटल में ‘विशेष व्यवस्था’ से फाइलों की प्रोसेसिंग होती है। यह स्थिति न केवल पारदर्शिता पर सवाल उठाती है बल्कि भ्रष्टाचार के गंभीर संकेत भी देती है।
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स्थायी अनुज्ञा पत्रों पर रोक लगाने की मांग
शिकायतकर्ता ने कमिश्नर से तत्काल हस्तक्षेप कर अवैध रूप से जारी हो रहे अस्थायी अनुज्ञा पत्रों पर रोक लगाने और होटल से संचालित हो रहे इस कथित समानांतर RTO कार्यालय पर कार्रवाई की मांग की है। शहर में यह मामला अब चर्चा का विषय बन चुका और लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर सरकारी दफ्तर होटल में क्यों चल रहा है। प्रशासन अब क्या कदम उठाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं। मामले में क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी अनपा खान से उनका पक्ष लेने मोबाइल पर संपर्क करने पर फोन रिसीव नहीं किया।

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