चंडीगढ़। पंजाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के बाद केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के लिए किए जा रहे निर्यात आधारित विकास के दावों पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे और ठोस नीतिगत समर्थन के बिना ऐसे बयान पंजाब को इसके वास्तविक लाभों से वंचित ही रखेंगे।
जालंधर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंजाबियों को संबोधन का उल्लेख करते हुए बाजवा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत-यूरोपीय संघ एफटीए के तहत यूरोप को सामान भेजने की बात की, लेकिन पंजाब की जमीनी हकीकत ऐसे दावों को संदिग्ध बनाती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने यूरोप के लिए नए निर्यात अवसरों की बात की। पंजाब का सवाल सीधा है कि जब राज्य खुद व्यावसायिक रूप से जकड़ा हुआ है, तो हमारा माल प्रतिस्पर्धी तरीके से कैसे भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के हालात तभी सुधरेंगे जब राज्य की सीमाएं खुलेंगी।
बाजवा ने कहा कि सीमा और जमीनी मार्गों से जुड़े राज्य के रूप में पंजाब का स्वाभाविक लाभ लगभग निष्प्रभावी कर दिया गया है। जमीनी सीमा बंद है। यूरेशिया और आगे यूरोप तक जाने वाले ओवरलैंड व्यापार मार्ग पंजाब के लिए सबसे सस्ते और प्रभावी हैं जो इस समय उपलब्ध नहीं हैं। निर्यातकों को लंबे और महंगे समुद्री मार्गों को अपनाने पर मजबूर किया जा रहा है, जिससे उत्पाद बाजार तक पहुंचने से पहले ही प्रतिस्पर्धा क्षमता घट जाती है।

बाजवा ने पंजाब में एयर कार्गो अवसंरचना की कमजोर स्थिति की ओर भी ध्यान दिलाया। हलवारा, आदमपुर और बठिंडा के हवाई अड्डे मुख्यतः नाममात्र की सुविधाएं प्रदान कर रहे हैं। इन हवाई अड्डों से कोई सार्थक कार्गो आवाजाही नहीं होती। यहां तक कि चंडीगढ़ और अमृतसर में भी उड़ानें सीमित हैं और कार्गो सुविधाएं कमजोर हैं।
केंद्रीय बजट पर टिप्पणी करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पंजाब को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है। बजट में पंजाब का कहीं उल्लेख नहीं किया गया। पंजाब के लिए कोई आर्थिक पुनरुद्धार रोडमैप, न औद्योगिक प्रोत्साहन, न बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार पैकेज और न ही कृषि को प्रोसेसिंग व निर्यात से जोड़ने की कोई गंभीर रणनीति नहीं बनाई।
बाजवा ने पंजाब के वित्तीय दबाव और संवेदनशील सीमावर्ती राज्य होने से जुड़ी चुनौतियों को नजरअंदाज किए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि सहकारी संघवाद की बात की जाती है, लेकिन जब आबंटन और नीतिगत समर्थन की बात आती है, तो वह नजर नहीं आता। उन्होंने कहा कि पंजाब किसी तरह की रियायत नहीं मांग रहा।
वह राष्ट्रीय विकास में न्यायसंगत सांझेदारी चाहता है। यदि केंद्र वास्तव में चाहता है कि पंजाब को भारत-यूरोपीय संघ एफटीए का लाभमिले, तो सीमाएं खोलनी होंगी, लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना होगा और पंजाब को देश की निर्यात रणनीति से जोड़ना होगा।
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