पश्चिम बंगाल के लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए आज का दिन ऐतिहासिक रहा। सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की खंडपीठ ने ममता बनर्जी सरकार को निर्देश दिया है कि 31 मार्च 2026 तक महंगाई भत्ते (DA) के कुल बकाया का 25 प्रतिशत भुगतान किया जाए। यह आदेश उसी दिन आया है जब बंगाल विधानसभा में लेखानुदान पेश किया जाना है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारियों के लंबे समय से लंबित महंगाई भत्ते (DA) का 25 प्रतिशत 31 मार्च 2026 तक चुकाया जाए। बकाया शेष 75 प्रतिशत के भुगतान का तरीका और समय सीमा तय करने के लिए अदालत ने एक उच्च स्तरीय चार सदस्यीय समिति बनाने का भी आदेश दिया है।
पिछले साल 16 मई को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को तीन महीने के भीतर लंबित महंगाई भत्ते (DA) का भुगतान करने को कहा था। हालांकि, राज्य सरकार ने फंड की कमी का हवाला देते हुए छह महीने की मोहलत मांगी थी। कोर्ट ने लगातार तारीखों में देरी पर कड़ा रुख अपनाया और अब कर्मचारियों के DA बकाया का 25 प्रतिशत 31 मार्च 2026 तक चुकाने की अंतिम समय सीमा तय कर दी है।
DA खैरात नहीं, अधिकार है: शुभेंदु अधिकारी
विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया और इसे कर्मचारियों के मौलिक अधिकारों की जीत बताया। अधिकारियों ने कहा, “ममता बनर्जी आज गलत साबित हुई हैं। वर्षों तक उन्होंने दावा किया कि महंगाई भत्ता (DA) कोई अधिकार नहीं, बल्कि दान है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह कर्मचारियों का हक है। राज्य सरकार ने कर्मचारियों को उनके हक से वंचित करने के लिए नामी वकीलों पर करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन अंततः न्याय की जीत हुई।”
केंद्र और राज्य के बीच बढ़ता अंतर
पश्चिम बंगाल में महंगाई भत्ते (DA) को लेकर विवाद काफी गहरा है। वर्तमान में 1 अप्रैल 2025 से राज्य के कर्मचारियों का DA मूल वेतन का 18 प्रतिशत तय किया गया था। हालांकि, केंद्र सरकार के कर्मचारियों को मिलने वाले DA और राज्य कर्मचारियों के बीच अब भी करीब 37-40 प्रतिशत का बड़ा अंतर है। केंद्रीय कर्मचारियों को फिलहाल 55 प्रतिशत DA मिलता है, जो बंगाल कर्मचारियों की तुलना में काफी अधिक है।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण राज्य सरकार ने फिलहाल केवल लेखानुदान पेश करने का निर्णय लिया है। पूर्ण बजट नई सरकार के गठन के बाद पेश किया जाएगा। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने ममता बनर्जी सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ा दिया है। 25% बकाया DA चुकाने के लिए राज्य को हजारों करोड़ रुपये का प्रावधान करना होगा, जिससे राज्य के वित्तीय संसाधनों पर असर पड़ेगा।
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