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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दक्षिणी दिल्ली नगर निगम द्वारा शाहीन बाग में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बीआर गवई ने वरिष्ठ अधिवक्ता पीवी सुरेंद्रनाथ से मामले को हाईकोर्ट लेकर जाने को कहा. इसमें कहा गया है कि “हमें हितों को संतुलित करने की जरूरत है.. लेकिन तब नहीं जब अतिक्रमण हटाया जा रहा है, उच्च न्यायालय जाएं.” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रस्तुत किया कि किसी भी तरह की गलत व्याख्या की जा रही है और यह अतिक्रमण के खिलाफ किया गया एक नियमित अतिक्रमण विरुद्ध अभियान है. सुरेंद्रनाथ ने जोर देकर कहा कि शीर्ष अदालत को मामले की सुनवाई करनी चाहिए, पीठ ने जवाब दिया कि याचिकाकर्ता को उच्च न्यायालय का रुख करना चाहिए. उन्होंने कहा, “यह बहुत अधिक है.”

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सुप्रीम कोर्ट ने जमकर लगाई फटकार

पीठ ने कहा कि नगर निगम पहली बार अतिक्रमण के खिलाफ विध्वंस अभियान नहीं चला रहा है. पीठ ने कहा कि “हम जीवन, आजीविका की रक्षा करना चाहते हैं, लेकिन इस तरह नहीं.” तुषार मेहता ने बताया कि 2020 और 2021 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सार्वजनिक सड़कों से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए थे. शुरुआत में पीठ ने पूछा, “माकपा क्यों याचिका दायर कर रही है .. अगर कोई पीड़ित आया होता, तो हम समझ सकते थे.” “प्रभावित पक्षों को अदालत में आने दें..” न्यायमूर्ति गवई ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत मौलिक अधिकार का उल्लंघन क्या है, सुरेंद्रनाथ ने जवाब दिया कि यह जनहित में है न कि पार्टी के हित में. जस्टिस राव ने कहा कि “इस अदालत को एक मंच न बनाएं.” हालांकि, सुरेंद्रनाथ ने कहा कि विध्वंस अभियान शुरू करने से पहले कोई नोटिस नहीं दिया गया था और कहा कि वे इमारतों को ध्वस्त कर रहे हैं. सुरेंद्रनाथ ने पूछा कि वे अतिक्रमण हटाने के लिए बुलडोजर का उपयोग क्यों कर रहे हैं और कहा कि याचिकाकर्ता एक फेरीवाला संघ है. हालांकि, न्यायमूर्ति राव ने कहा कि फेरीवाले किसी भी इमारत में नहीं हैं. पीठ ने कहा, “हम इस पर सुनवाई नहीं करेंगे. याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने पर सहमति जताई.”

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लोहे की रॉड्स गिरवा वापस लौटे निगमकर्मी

इधर दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की टीम अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई के लिए शाहीन बाग पहुंची थी, लेकिन उन्हें बैरंग ही लौटना पड़ा. भारी पुलिस बल के बीच एमसीडी के अधिकारी सुबह शाहीन बाग कार्रवाई की नीयत से आए, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते सभी को खाली हाथ लौटना पड़ा. इसी बीच निगम के बुलडोजर ने सिर्फ एक बिल्डिंग के बाहर लगी लोहे की रॉड्स को हटवाया, जो वहां रेनोवेशन के काम के लिए लगी थी. फिलहाल शाहीन बाग से बुलडोजर वापस चला गया है. दुकान के संचालकों ने बताया कि दुकान के बाहरी हिस्से में कुछ काम होना था, इसलिए यह लोहे की रॉड्स लगवाई गई थी, निगम के अधिकारियों ने हमसे कहा कि हटवाओ, हमने खुद ही इसे हटवा दिया. इलाके में निगम की इस कार्रवाई के कारण दुकानदारों ने खुद दुकानों को बंद कर अपने-अपने घर चले गए हैं. दरअसल सुबह इलाके में पहुंचे बुलडोजर के आगे स्थानीय लोग और तमाम नेता लेट गए और विरोध करने लगे. हालंकि पुलिसकर्मियों ने सभी को हिरासत में ले लिया और स्थानीय थाने ले गए.

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आप विधायक अमानतुल्लाह ने कहा लोगों ने खुद ही हटा लिए हैं अतिक्रमण

निगम की कार्रवाई पर आप विधायक अमानतुल्लाह खान ने कहा कि मैं इस इलाके में कुछ दिन पहले आया और लोगों से आह्वान किया था. आह्वान के बाद लोगों ने खुद अतिक्रमण हटा दिया, एक मस्जिद के बाहर वजूखाना था, उसे भी हटवा दिया गया है. अब एमसीडी बताए कि कहां अतिक्रमण है. ये पीडब्ल्यूडी की रोड है. लोकल पुलिस भी है. मुझसे बात करें. हम खुद अतिक्रमण को हटवा देंगे. सिर्फ राजनीति हो रही है और माहौल खराब किया जा रहा है. शाहीन बाग में निगम की कार्रवाई के लिए 100 सीआरपीएफ जवान सहित की एक अतिरिक्त कंपनी दिल्ली पुलिस के साथ लॉ एंड ऑर्डर के लिए लगाई गई है, जो कि वापस लौट गई है. इससे पहले निगम की कार्रवाई के लिए पुलिस की ओर से सुरक्षाकर्मियों को तैनात नहीं किया गया था, जिसके चलते कार्रवाई संभव नहीं हो सकी थी. वहीं इस मसले पर भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि शाहीन बाग हो या जहांगीरपुरी या सीमापुरी ये सब अवैध धंधों, अवैध निर्माणों और अवैध घुसपैठियों के अड्डे हैं. यहां बुलडोजर, पुलिस, कानून की एंट्री बैन है. ये छोटे-छोटे मिनी पाकिस्तान जैसे हैं, जहां भारत का संविधान लागू करवाना भी असंभव बनता जा रहा है.

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