अमेरिका और चीन के बीच तनाव दक्षिण चीन सागर में एक बार फिर सुर्खियों में है. अमेरिका ने अपने परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन को इस विवादित इलाके में तैनात किया है. फिलहाल यह साफ नहीं है कि USS अब्राहम लिंकन कितने समय तक दक्षिण चीन सागर में रहेगा. बुधवार को अमेरिकी नौसेना ने तस्वीरें जारी कीं, जिनमें USS अब्राहम लिंकन को दक्षिण चीन सागर में फ्लाइट ऑपरेशंस करते हुए देखा जा सकता है. नौसेना का कहना है कि इस तैनाती का मकसद क्षेत्र में किसी भी तरह की आक्रामक गतिविधि को रोकना, सहयोगी देशों के साथ सैन्य तालमेल मजबूत करना और शांति बनाए रखना है.

चीन और कई पड़ोसी देशों के बीच दक्षिण चीन सागर को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है. चीन इस पूरे इलाके के बड़े हिस्से पर ऐतिहासिक अधिकार का दावा करता है, जो फिलीपींस समेत कई देशों के दावों से टकराता है. फिलीपींस अमेरिका का रक्षा सहयोगी भी है, ऐसे में अमेरिका की मौजूदगी इस क्षेत्र में और अहम हो जाती है.

फिलहाल यह साफ नहीं है कि USS अब्राहम लिंकन कितने समय तक दक्षिण चीन सागर में रहेगा. USS अब्राहम लिंकन से जिन विमानों को उड़ान भरते देखा गया, उनमें F-35C लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर जेट्स शामिल हैं. यह F-35 सीरीज़ का ऐसा वर्जन है, जिसे खासतौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर से ऑपरेट करने के लिए तैयार किया गया है. इसके अलावा F/A-18 सुपर हॉर्नेट फाइटर जेट और EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक अटैक एयरक्राफ्ट भी तैनात किए गए हैं. फिलहाल यह साफ नहीं है कि USS अब्राहम लिंकन कितने समय तक दक्षिण चीन सागर में रहेगा. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप संकेत दे चुके हैं कि जरूरत पड़ने पर इसे मिडिल ईस्ट भी भेजा जा सकता है, खासकर अगर ईरान को लेकर हालात बिगड़ते हैं.

जहाजों की संख्या के लिहाज से चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है. यही कारण है कि अमेरिका पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में नियमित तौर पर अपने एयरक्राफ्ट कैरियर भेजता है, ताकि सहयोगी देशों को भरोसा दिलाया जा सके कि अमेरिका उनके साथ खड़ा है. अमेरिका मानता है कि अगर किसी देश का दक्षिण चीन सागर पर पूरा नियंत्रण हो गया, तो वह दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों को अपने हिसाब से चला सकता है.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m