अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता की USCIRF की ताजा रिपोर्ट में RSS संगठन पर बैन लगाने की सिफारिश की गई है। यह रिपोर्ट भारतीय अधिकारियों और पूर्व जजों के बीच विवाद का कारण बन गई है। 275 पूर्व जजों, सरकारी अधिकारियों और सैन्य व्यक्तियों ने इस रिपोर्ट का विरोध किया है और इसे पक्षपाती करार दिया है। शनिवार को जारी बयान में इन पूर्व अधिकारियों ने कहा कि यह रिपोर्ट किसी मकसद से बनाई गई है और इसमें ठीक से सोच-समझकर बात नहीं की गई। उनका कहना है कि बिना पक्के सबूतों के भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाया गया है।
बयान में कहा गया कि RSS जैसे संगठन पर बैन लगाना, उसकी संपत्ति जब्त करना और लोगों के आने-जाने पर रोक लगाना बिल्कुल गलत और बेकार सुझाव हैं। पूर्व अधिकारियों ने अमेरिकी सरकार से कहा कि जो लोग यह रिपोर्ट बना रहे हैं, उनकी जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि कुछ भारत-विरोधी लोग ऐसी रिपोर्ट के जरिए दोनों देशों के बीच भरोसा खराब करना चाहते हैं।
USCIRF पर संस्थाओं को गलत तरीके से दिखाने का आरोप
पूर्व जजों और अधिकारियों ने बयान में यह भी कहा कि USCIRF बार-बार भारतीय संस्थाओं को बिना पूरी जानकारी के गलत तरीके से दिखाता है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर शक होता है। पूर्व अधिकारियों ने कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां अदालतें और दूसरी संस्थाएं सही तरीके से काम करती हैं। इसलिए धार्मिक आजादी के मामलों को अनदेखा होने की संभावना बहुत कम है।
USCIRF की निष्पक्षता पर सवाल
बयान में पूर्व जजों और अधिकारियों ने USCIRF पर आरोप लगाया है कि वह बार-बार भारतीय संस्थाओं को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। इससे उनकी निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह उठता है। बयान देने वालों में 25 रिटायर्ड जज और 119 पूर्व सरकारी अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 10 राजदूत भी हैं। इस मुद्दे ने दोनों देशों के बीच बातचीत को एक नया मोड़ दिया है।
भारत का लोकतांत्रिक ढांचा मजबूत
पूर्व अधिकारियों ने यह भी कहा कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है, जहां न्यायालयों और सरकारी संस्थाओं का कार्य निष्पक्षता से होता है। उन्हें विश्वास है कि धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़ी समस्याओं को नजरअंदाज करने की संभावना बेहद कम है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका को भारत की वास्तविकता को समझना है, तो उसे अधिक जानकारी के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
बयान में शामिल प्रमुख हस्तियां
इस बयान पर प्रमुख हस्तियों में आदर्श कुमार गोयल, हेमंत गुप्ता, ओपी रावत, सुनील अरोड़ा और कंवल सिब्बल जैसे नाम शामिल हैं। बयान को तैयार करने और जोड़ने का कार्य भास्वती मुखर्जी और एम. मदन गोपाल ने किया है। इस प्रकार, इस मुद्दे ने भारत और अमेरिका के संबंधों में जबरदस्त बहस का विषय बना दिया है।
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