देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने खाने की आजादी यानी डाइटरी फ्रीडम का समर्थन करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद का भोजन करने का अधिकार है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में विविधता का सम्मान करना बेहद जरूरी है और किसी की खानपान की पसंद को लेकर भेदभाव नहीं होना चाहिए।

दीक्षांत समारोह में दिया अहम संदेश

श्रीनगर में यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम अपनी पसंद पर गर्व कर सकते हैं, लेकिन दूसरों की पसंद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी मौजूद थे। समारोह में लगभग 60,000 डिग्रियां प्रदान की गईं।

उपराष्ट्रपति सुनाया सालों पुराना किस्सा

उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कई मुद्दों पर चर्चा की. इस दौरान उन्होंने बताया कि जब वह झारखंड के राज्यपाल थे, तब एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के तहत जम्मू-कश्मीर से छात्रों का एक दल रांची के राजभवन आया था.

उन्होंने कहा कि वह खुद शाकाहारी (वेजिटेरियन) हैं, लेकिन उन्होंने उस समय अधिकारियों को आदेश दिया था कि कश्मीरी छात्रों को नॉन-वेज खाना परोसा जाए, क्योंकि ज्यादातर छात्र नॉन-वेज खाते हैं. उनका मानना था कि मेहमानों को उनकी पसंद का खाना मिलना चाहिए. अपने मन का खाना हर कोई खाना चाहता है, हमेशा लोगों को अपने मन का ही खाना खाना चाहिए. ऐसा करने में किसी को भी किसी तरह की कोई समस्या भी नहीं होनी चाहिए.

महिलाएं जम्मू-कश्मीर की तरक्की की मिसाल

वाइस प्रेसिडेंट ने दीक्षांत समारोह में महिला प्रतिनिधित्व पर भी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा मंत्री एक महिला हैं. यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर भी महिला हैं. गोल्ड मेडल पाने वालों में ज्यादातर छात्राएं थीं. उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में महिलाओं की तरक्की और सशक्तिकरण की बड़ी मिसाल बताया है.

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