मौजूदा साल 2026 में तीसरा विश्व युद्ध होने की आशंका कई एक्सपर्ट जता रहे हैं। बड़ी ताकतों के व्यवहार पर रोक कमजोर होने से 2026 में दुनिया के पांच क्षेत्रों में तनाव बढ़ने का खतरा है। मौजूदा साल 2026 के पहले महीने में ही दुनिया के कई हिस्सों में तनाव की स्थिति देखने को मिल रही है. ईरान में अमेरिका के संभावित हमले को लेकर पूरे पश्चिम एशिया में डर का माहौल है. वहीं ग्रीनलैंड पर कब्जे के अमेरिकी प्लान ने यूरोप की चिंता बढ़ा दी है. रूस-यूक्रेन युद्ध लगातार जारी है और एशिया में भारत और पाकिस्तान के बीच भी तनाव बरकरार है. ऐसे में 2026 में एक डरावने तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत की आशंका गहरा रही है। हम पांच ऐसे फ्लैश प्वाइंट की बात कर रहे हैं, जो 2026 में विश्व युद्ध की वजह बन सकते हैं।
साल 2026 की शुरुआत में ही दुनिया के कई हिस्सों में तनाव गहराता नजर आ रहा है। ईरान पर अमेरिकी हमले की आशंका से पश्चिम एशिया में डर का माहौल है. विशेषज्ञों के मुताबिक, दुनिया में फिलहाल ऐसे कम से कम पांच बड़े फ्लैश प्वाइंट हैं, जो 2026 में किसी बड़े वैश्विक संघर्ष की वजह बन सकते हैं.
कुछ समय पहले तक यह विचार बेतुका और कल्पना करना भी मुश्किल था कि ग्रीनलैंड किसी अंतरराष्ट्रीय टकराव का केंद्र बन सकता है. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड चाहिए और इस इच्छा को पूरा करने के लिए वह सैन्य बल के इस्तेमाल की धमकी भी परोक्ष रूप से दे चुके हैं. ट्रंप लगातार डेनमार्क और यूरोप को चेतावनी देते रहे हैं.
यूरोपीय देशों ने अपनी गंभीरता दिखाने के लिए बहुराष्ट्रीय बल के साथ ग्रीनलैंड को मजबूत किया है. हालांकि यह संभावना कम है कि यहीं से संघर्ष भड़क जाए, लेकिन यूरोपीय और अमेरिकी बलों के बीच किसी भी तरह की झड़प गंभीर हालात पैदा कर सकती है. इसके अलावा अटलांटिक पार संबंधों पर भी इसके नकारात्मक असर पड़ सकते हैं.
रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी में अपने पांचवें वर्ष में प्रवेश करने वाला है. रूस मोर्चे पर छोटे लेकिन लगातार लाभ हासिल कर रहा है, जबकि यूक्रेन बड़े रणनीतिक हवाई हमलों का सामना करते हुए भी डटा हुआ है. साल 2025 में दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ताएं असफल रहीं और इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि 2026 में यह संघर्ष और ज्यादा भड़क सकता है.
अगर यूक्रेन की स्थिति कमजोर होती है, तो कीव अपने यूरोपीय साझेदारों से मदद की अपील करेगा. कुछ यूरोपीय देशों ने पहले ही हालात गंभीर होने पर यूक्रेन में सैनिक भेजने का सुझाव दिया है. अगर रूसी और यूरोपीय सैनिक यूक्रेन में या खुले समुद्र में आमने-सामने आते हैं, तो इसके परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं और यह टकराव विश्व युद्ध जैसी शक्ल ले सकता है.
पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में स्थित द्वीप राष्ट्र ताइवान भी बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है. चीन की लगातार बढ़ती सैन्य तैनाती इस क्षेत्र का संतुलन बदल रही है. दूसरी ओर, ताइवान भी रुक-रुक कर अपने सैन्य ढांचे को मजबूत कर रहा है, क्योंकि अमेरिका की ओर से ताइवान की रक्षा को लेकर संकेत कई सालों से अनिश्चित रहे हैं.
साल 2025 की शुरुआत से ही ईरान बेहद कठिन हालात का सामना कर रहा है. बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर हमले की धमकी दी है. अमेरिका का कहना है कि ईरान परमाणु हथियारों पर काम कर रहा है और अपने नागरिकों का दमन कर रहा है, इसलिए सैन्य कार्रवाई जरूरी है.
भारत और पाकिस्तान में तनातनी दशकों पुरानी है लेकिन बीते साल मई के चार दिन के सैन्य संघर्ष ने दोनों देशों के रिश्ते में कड़ावाहट को बढ़ा दिया है। बीते साल के सीजफायर के बाद भी दोनों ओर से आक्रामक बयानबाजी जारी है। चूंकि भारत-पाकिस्तान दोनों परमाणु संपन्न देश हैं। ऐसे में यह एक ऐसा प्वाइंट है, जिससे दुनिया डरती है।
इसलिए कहा जा सकता है कि दुनिया दस साल पहले की तुलना में कम सुरक्षित है। उकसावे की घटनाएं तेज़ी से बढ़ रही हैं और संघर्ष को रोकने वाले पारंपरिक तरीके कमजोर पड़ रहे हैं। इस सिस्टम के बीच उम्मीद की जा सकती है कि साल 2026 में कोई बड़ा सिस्टमैटिक युद्ध नहीं छिड़ेगा और दुनिया समझदारी से काम लेगी।
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