तेलंगाना के हैदराबाद में साइबर ठगों ने एक 81 साल के रिटायर्ड बिजनेसमैन को ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर 7.12 करोड़ रुपये की चपत लगा दी. यह मामला साइबर अपराध की बढ़ती और खतरनाक प्रवृत्तियों की ओर इशारा करता है, जहां बुजुर्गों को डर और मानसिक दबाव में फंसाकर उनकी जीवनभर की कमाई लूट ली जा रही है. पीड़ित ने अब तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो (TGCSB) में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद जांच शुरू कर दी गई है. पीड़ित को 27 अक्टूबर 2025 को व्हाट्सऐप कॉल आई. कॉल करने वाले ने खुद को एक नामी कूरियर कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके नाम से थाईलैंड भेजा जा रहा एक पार्सल पकड़ा गया है, जिसमें नशीले पदार्थ, फर्जी पासपोर्ट और क्रेडिट कार्ड मिले हैं. कुछ ही देर में कॉल को कथित तौर पर मुंबई पुलिस के अधिकारियों से जोड़ दिया गया.

ताजा मामला हैदराबाद से सामने आया है, जहां 81 वर्षीय रिटायर्ड बिजनेसमैन को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 7.12 करोड़ रुपये ठग लिए. इससे पहले बेंगलुरु में भी 57 साल की महिला से इसी तरह 32 करोड़ रुपये की ठगी हो चुकी है. फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर आरोपियों ने उन्हें डराया और पैसे ट्रांसफर करवाए. अतिरिक्त रकम की मांग पर शक होने के बाद पीड़ित ने तेलंगाना साइबर सुरक्षा ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई, मामले की जांच जारी है.

कुछ देर बाद दूसरा कॉल आया, जिसमें कॉलर ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया. उसने कहा कि सबूतों के आधार पर बुजुर्ग पर गंभीर आरोप लग सकते हैं. इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया और डराकर RTGS के जरिए अलग-अलग खातों में 7.12 करोड़ रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए. बुजुर्ग पर मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग तस्करी और आतंकवाद से जुड़े होने जैसे गंभीर आरोप लगाए. इसके बाद उन्हें वीडियो कॉल के जरिए तथाकथित “डिजिटल अरेस्ट” में रखा गया. आरोपियों ने पीड़ित को यह कहकर डराया कि यदि उन्होंने किसी को भी इस बारे में बताया- चाहे परिवार हो, बैंक हो या वकील तो उनके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई कर दी जाएगी.

29 दिसंबर को जब ठगों ने केस बंद करने के नाम पर अतिरिक्त 1.2 करोड़ रुपये की मांग की, तब पीड़ित को शक हुआ. हाल के दिनों में मीडिया में सामने आए ‘डिजिटल अरेस्ट’ से जुड़े मामलों को याद करते हुए उन्होंने 30-31 दिसंबर को TGCSB से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी. मानसिक दबाव और डर के माहौल में फंसे पीड़ित ने अपने फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड तोड़ दिए. 29 अक्टूबर से 5 दिसंबर 2025 के बीच उन्होंने कई बार आरटीजीएस के जरिए कुल 7.12 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए.

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