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अनमोल मिश्रा, सतना। कभी एक जमाने में राजाओं के शासन काल में राजाओं के द्वारा बावड़ियों का निर्माण कराया गया था, बावड़िया ना सिर्फ पानी मुहैया कराने के काम में आते थे बल्कि यह नगर की शान भी माने जाते थे। वहीं कोठी बस स्टैंड सहित वार्ड नंबर 01 पतेरिया में ऐतिहासिक बावड़ी अब देखरेख एवं रखरखाव के अभाव में अपने अस्तित्व के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं, या यूं कहे कि अपना अस्तित्व खोते जा रहे हैं।
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क्या है मामला
मामला सतना जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर की दूर का है। जहां नगर परिषद कोठी के अंतर्गत बस स्टैंड कोठी और वार्ड नंबर 01 पतेरिया में स्थित अति प्राचीन और कभी अति उपयोगी रहे जल स्रोतों के रखरखाव जीर्णोद्धार एवं संरक्षण की और ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदेश की मोहन सरकार पूरे प्रदेश में नमामि गंगे जल संवर्धन अभियान चला रही है, जिसके तहत प्राचीन बावड़िया, कुएं एवं तालाबों की साफ-सफाई कर उसे नया रूप दिया जा रहा है। लेकिन तमाम सरकारी फरमान सतना जिले की नगर परिषद कोठी में आकर बे असर साबित हो जाते हैं। इसका जीता जागता सबूत नगर परिषद कोठी में स्थित बावड़ियां है।
- स्थानीय निवासी डॉ. केके मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि, राजा महाराजाओं के द्वारा इस बावड़ी का निर्माण कराया गया था। लेकिन नगर परिषद कोठी की अनदेखी के चलते पूरी बावड़ी में कचरा डालकर उसे भर दिया गया। मरम्मत करना तो दूर की बात है इस बावड़ी में साफ सफाई तक भी नहीं करवाई गई।
- कोठी के स्थानीय निवासी कमलेश पाठक ने बताया कि, हर जगह से बावड़ी में अतिक्रमण कर लिया गया है, नगर परिषद कोठी इस तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहा, होटलों का गंदा पानी एवं कचरा डाल कर बावड़ी का अस्तित्व समाप्त कर दिया गया।
- कोठी के स्थानीय निवासी उमाकांत उरमलिया का कहना है कि, इस बावड़ी का बहुत पुराना इतिहास है। इस बावड़ी से यहां के आमजन पेयजल को लेकर आश्रित रहते थे, उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस बावड़ी का जीर्णोद्धार कर दिया जाए आज भी जल स्रोत का मुख्य कारण बन सकती है।
वही जब इस मामले को लेकर मुख्य नगर परिषद अधिकारी कोठी डॉ. पूजा द्विवेदी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जो भी प्राचीन बावड़ी क्षतिग्रस्त हो चुकी है उनका एस्टीमेट इंजीनियर के द्वारा बनाकर उसे जीर्णोद्धार किया जाएगा। वहीं अनुविभागीय अधिकारी रघुराजनगर राहुल सिलोड़िया नें कहा कि प्राचीन बावड़ी का जीर्णोद्धार बारिश के पहले कर लिया जाएगा।
क्या है इसका इतिहास
एक जमाने में लोगों की प्यास बुझाने के लिए राजाओं के द्वारा बावड़ियों का निर्माण कराया था। लेकिन उन्हें यह उम्मीद नहीं थी कि आने वाली पीढ़ी उनके दिए हुए ऐतिहासिक धरोहरों को संजोने में नाकाम साबित होगी, लगभग विगत 300 वर्ष पुराने इस ऐतिहासिक बावड़ी का निर्माण कोठी राज्य के राजाओं के द्वारा कराया गया था। जिनका जीर्णोद्धार कर पाने में नगर प्रशासन कोठी के जिम्मेदार नाकाम साबित हो रहे हैं।
सतना जिले के नगर परिषद कोठी में स्थित प्राचीन बावड़ियों का जीर्णोद्धार कर दिया जाए, तो निश्चित तौर पर वह अपने अस्तित्व में आ जाएगी और लोगों के लिए समुचित जल की व्यवस्थाएं भी इन बावड़ियों के माध्यम से हो जाएगी, एवं जल स्रोत भी हमेशा के लिये सुरक्षित हो जायेंगे, साथ ही राजाओं के द्वारा बनवाई गई इन ऐतिहासिक धरोहर बावड़ियां अपने अस्तित्व में आ जाएंगी।
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