भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित प्रदोष व्रत कई शुभ संयोग के कारण इस बार खास होने जा रहा है. सोमवार के दिन पड़ रही त्रयोदशी तिथि के कारण इस बार सोम प्रदोष व्रत रखा जाएगा. 30 मार्च को शाम 6 बजकर 38 मिनट से 8 बजकर 57 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा. पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च सुबह 7 बजकर 09 बजे से शुरू होकर 31 मार्च सुबह 6 बजकर 55 बजे तक रहेगी.

हालांकि प्रदोष काल शाम को मिलने के कारण इसी दिन व्रत करना उचित माना गया है. इस दिन भगवान शिव की पूजा के लिए कुल 2 घंटे 19 मिनट का विशेष शुभ मुहूर्त मिलेगा. श्रद्धालु इस समय में विधि-विधान से पूजा और जलाभिषेक कर सकते हैं. इसके अलावा, इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 41 मिनट से 5 बजकर 27 मिनट तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 01 मिनट से 12 बजककर 51 मिनट तक रहेगा, जबकि निशिता मुहूर्त रात 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक मान्य होगा.

सोम प्रदोष पर बन रहा रवि योग

सोम प्रदोष व्रत पर इस बार रवि योग भी बन रहा है, जो 30 मार्च दोपहर 2 बजकर 48 बजे से शुरू होकर 31 मार्च सुबह 6 बजकर 13 बजे तक रहेगा. इस योग को दोष नाशक और शुभ फल देने वाला माना गया है.

क्यों किया जाता है प्रदोष व्रत

ऐसा माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को सुख, धन, संतान, उत्तम स्वास्थ्य और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है. प्रदोष व्रत हर महीने में दो बार रखा जाता है. पहला कृष्ण और दूसरा शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथी को.

व्रत के बाद दाल का भी महत्व

पूजा के बाद दान करना शुभ माना गया है. इस दिन जरूरतमंदों को अन्न या धन का दान करें. सुबह के समय गाय को हरा चारा खिलाना भी लाभकारी बताया जाता है. विशेष कार्य में सफलता के लिए इस दिन शिवलिंग पर केसर मिला दूध अर्पित करते करना चाहिए. ओम नमः शिवाय मंत्र का जप करना बहुत ज्यादा लाभकारी माना गया है.