अरावली पहाड़ियों पर रोक बावजूद भी अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इससे ऐसे हालात बनेंगे, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकेगा। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि खनन रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करेगा। इसके अलावा कोर्ट ने राजस्थान सरकार से गारंटी ली कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।]

कोर्ट ने पहले छोटी पहाड़ियों पर खनन का आदेश दिया, फिर वापस लिया था

बता दें कि, सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को जारी आदेश में 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन के आदेश दिए थे। जिससे पूरे देश में 100 मीटर की परिभाषा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। 29 नवंबर को अपने ही आदेश पर रोक लगा दी थी। मामले की जांच के लिए एक्सपर्ट कमेटी गठित करने के निर्देश देते हुए केंद्र और अरावली के चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को भी नोटिस जारी कर इस मुद्दे पर जवाब मांगा था।

अरावली पर्वतमाला को संरक्षण करना महत्वपूर्ण

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा- यह कोई प्रतिद्वंद्वी मुकदमा नहीं है, बल्कि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण करना उद्देश्य है। पीठ ने कहा- 29 दिसंबर 2025 के आदेश में स्वतः संज्ञान लेते हुए जिन पॉइंट को रेखांकित किया था। उन्हें देखते हुए अरावली की परिभाषा से जुड़े वैज्ञानिक, पर्यावरणीय, भूवैज्ञानिक एवं विधिक पहलुओं की पुनः समीक्षा के लिए स्वतंत्र विशेषज्ञ निकाय की आवश्यकता हो सकती है।

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