Greenland Protest: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ग्रीनलैंड पर कब्जे के ऐलान के बाद अमेरिका और यूरोप (US and Europe) में रिश्ते तल्ख हो गए हैं। स्थिति यह गई है कि नाटो में फूट पड़ गई है। ट्रंप के दावे पर ग्रीनलैंड में उबाल है। ग्रीनलैंड पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्जे के विरोध में आज यानी 18 जनवरी को राजधानी नूक में सैकड़ों लोग सड़कों पर उतरे। ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन की अगुवाई में US कॉन्सुलेट तक मार्च निकाला। वहीं डेनमार्क और यूरोप ने NATO मौजूदगी बढ़ाने का संकेत दिया है। हजारों लोग बर्फ से ढकी सड़कों पर उतर आए। यह प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा और संगठित जनआंदोलन बताया जा रहा है।
हाथों में झंडे और बैनर लेकर लोग अमेरिकी कॉन्सुलेट की ओर मार्च करते नजर आए। प्रदर्शन के दौरान साफ संदेश दिया गया कि ग्रीनलैंड को अपने भविष्य का फैसला खुद करने दिया जाए। इस दौरान प्रदर्शकारियों ने हम न अमेरिकी हैं, न कभी होंगे जैसे नारे लगाए।
बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और वहां मौजूद बड़े खनिज भंडार अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। ट्रंप यह भी कह चुके हैं कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के लिए बल प्रयोग से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इसी सप्ताह डेनमार्क के अनुरोध पर यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सैन्य कर्मियों की तैनाती की है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
ट्रंप के करीबी स्टीफन मिलर का तीखा बयान
इस विवाद को और हवा तब मिली जब व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ (पॉलिसी) स्टीफन मिलर ने ट्रंप के दावे को दोहराते हुए कहा कि डेनमार्क ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं कर सकता। फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम हैनिटी में मिलर ने कहा, किसी इलाके पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि आप उसकी रक्षा कर सकें, उसे बेहतर बना सकें और वहां रह सकें। डेनमार्क इन तीनों ही कसौटियों पर फेल रहा है।
NATO सहयोगियों के बीच राजनयिक संकट बढ़ा
इधर अमेरिकी राष्ट्रपति के हठ ने अमेरिका और यूरोप के बीच राजनयिक संकट पैदा कर दिया है। ग्रीनलैंड पर कब्जे लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के ऐलान के बाद नाटो (NATO) में ही फूट पड़ गई है। ग्रीनलैंड पर अमेरिका और यूरोप में तकरार बढ़ गई है। फ्रांस और ब्रिटेन ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी कब्जे का विरोध किया। इसके बाद ट्रंप ने फ्रांस-ब्रिटेन समेत 8 देशों पर 10% टैरिफ (10% tariff) लगाया। अब यूरोपीय नेताओं (खासकर फ्रांस ने) ने एकजुट होकर इसका विरोध किया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने ट्रंप के फैसले पर लिखा-फ्रांस यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसी आधार पर फ्रांस यूक्रेन का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। मामला अब अमेरिका और यूरोपमें कूटनीति से आगे आर्थिक जंग की ओर बढ़ता दिख रहा है।
फ्रांस को ट्रंप की धमकियां नामंजूर
फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के फैसले पर लिखा-फ्रांस यूरोप और दुनिया के दूसरे हिस्सों में देशों की संप्रभुता और स्वतंत्रता के लिए प्रतिबद्ध है। इसी आधार पर फ्रांस यूक्रेन का समर्थन करता है और आगे भी करता रहेगा। इसी वजह से फ्रांस ने ग्रीनलैंड में डेनमार्क द्वारा आयोजित सैन्य अभ्यास में हिस्सा लेने का फैसला किया। फ्रांस इस फैसले की पूरी जिम्मेदारी लेता है, क्योंकि आर्कटिक क्षेत्र और यूरोप की बाहरी सीमाओं की सुरक्षा दांव पर है। मैक्रों ने आगे लिखा-‘फ्रांस को न तो धमकियों से डराया जा सकता है और न ही दबाव में लाया जा सकता है। चाहे मामला यूक्रेन का हो, ग्रीनलैंड का हो या दुनिया के किसी भी हिस्से का। मैक्रों ने ये भी कहा कि टैरिफ यानी शुल्क लगाने की धमकियां पूरी तरह गलत हैं. अगर ऐसी धमकियां सच में लागू होती हैं, तो यूरोपीय देश एकजुट होकर और मिलकर जवाब देंगे. यूरोप अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
डेनमार्क का जवाब- NATO मौजूदगी बढ़ेगी
डेनमार्क ने साफ किया है कि वह ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए NATO की ज्यादा स्थायी और मजबूत मौजूदगी की योजना पर आगे बढ़ रहा है। इसी के तहत यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में सैनिक भेजे हैं। ग्रीनलैंड के लोगों और वहां के नेताओं के बीच बेचैनी बढ़ गई है, लेकिन उन्होंने डेनमार्क के साथ एकजुटता पर जोर दिया है।
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