नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की अर्थव्यवस्था को नई गति देने और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने बड़ा मास्टरप्लान तैयार किया है। इसके तहत राजधानी में तीन नए ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट (हरित क्षेत्र औद्योगिक परिसर) विकसित किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन नए औद्योगिक परिसरों के विकसित होने से न सिर्फ औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़ी संख्या में युवाओं के लिए नौकरी के नए अवसर भी पैदा होंगे।

ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट ऐसे क्षेत्रों में विकसित किए जाते हैं, जहां पहले से औद्योगिक ढांचा मौजूद नहीं होता। इन्हें आधुनिक सुविधाओं, बेहतर कनेक्टिविटी और पर्यावरण के अनुकूल बुनियादी ढांचे के साथ तैयार किया जाता है। इस योजना के तहत दिल्ली को एक आधुनिक औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा, जिससे निवेश आकर्षित होगा और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

1143 एकड़ को बनाया जाएगा ग्रीनफील्ड

इसके तहत शहर में तीन नए ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित किए जाएंगे, जिनका कुल क्षेत्रफल 1143 एकड़ होगा। अधिकारियों के मुताबिक, इन औद्योगिक परिसरों को पूरी तरह ग्रीनफील्ड मॉडल पर विकसित किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए यहां एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस), ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल), इलेक्ट्रॉनिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक और स्वच्छ उद्योगों को बढ़ावा दिया जाएगा।

सरकार ने इस परियोजना के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है, जबकि इसका विस्तृत खाका मार्च में जारी दिल्ली आर्थिक सर्वेक्षण 2026 में पेश किया जा चुका है। योजना का सबसे अहम हिस्सा उत्तर-पश्चिम दिल्ली का कंझावाला क्षेत्र है, जहां 915 एकड़ भूमि पर एक विशाल इंडस्ट्रियल एस्टेट विकसित किया जाएगा। यह परियोजना राजधानी के अब तक के सबसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों में से एक मानी जा रही है।

हरित उद्योग को बढ़ाने की तैयारी

दरअसल, दिल्ली में फिलहाल 30 से अधिक पुराने औद्योगिक क्षेत्र जैसे ओखला, वजीरपुर और नरेला दशकों पुराने हो चुके हैं, जहां जगह की भारी कमी है। वहीं, राजधानी में सर्विस सेक्टर का योगदान तो बढ़ रहा है, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को आधुनिक बनाने के लिए ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए इन नए औद्योगिक क्षेत्रों को रिहायशी इलाकों से दूर और पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे व प्रमुख हाईवे के करीब विकसित करने की योजना बनाई गई है, ताकि लॉजिस्टिक्स और परिवहन आसान हो सके।

प्रदूषण मुक्त होग औद्योगिक क्षेत्र

सरकार का लक्ष्य इन नए औद्योगिक क्षेत्रों को जीरो एमिशन जोन के रूप में विकसित करना है। आर्थिक सर्वेक्षण 2026 के अनुसार, इन पार्कों में केवल ग्रीन कैटेगरी के उद्योगों को ही अनुमति दी जाएगी, ताकि दिल्ली के पर्यावरण पर किसी तरह का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

क्यों जरूरी हैं ये योजनाएं

पुराने इंडस्ट्रियल एरिया अब क्षमता से अधिक भर चुके हैं

नई टेक्नोलॉजी आधारित उद्योगों के लिए पर्याप्त जगह नहीं है

बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा और लोगों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी

किन उद्योगों पर रहेगा फोकस

एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित उद्योग

इलेक्ट्रॉनिक सामानों का निर्माण

ई-व्हीकल और बैटरी निर्माण

बायोटेक्नोलॉजी से जुड़े उद्योग

आईटी सेवाओं से संबंधित उद्योग

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