रायपुर. इसे क्या कहेंगे, दुर्भाग्य, समय की मार या फिर नियति, जो भी कहें, ये चारों शिक्षक उस वक्त को कोस रहे होंगे, जब लोकसभा चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी और कलेक्टर को अपनी गंभीर बीमारी की जानकारी दे दी. कलेक्टर ने इनकी गंभीर बीमारी को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी से इनकी अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कार्रवाई करने का फरमान सुना दिया.

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर छांटा पूर्व माध्यमिक शाला में उच्च वर्ग शिक्षक के तौर पर पदस्थ मनोज कुमार साहू, टेकारी कुंडा स्थित हायर सेकंडरी स्कूल में पदस्थ व्याख्याता पंचायत नमिता वर्मा व व्याख्याता रचना मिश्रा और जुगेसर विद्या मंदिर के प्रधान पाठक गोपीराम जांगड़े को पीठासीन अधिकारी नियुक्त किया गया है. इनमें से मनोज कुमार, रचना मिश्रा और गोपीराम ने डायबिटिज का हवाला देते हुए आंख से ठीक से दिखाई नहीं देने पर और नमिता वर्मा ने मानसिक रूप से असमर्थ होने पर कार्य से मुक्त करने का आवेदन दिया.

जिला निर्वाचन अधिकारी ने इनकी गंभीर बीमारी को पूरी गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के 50 वर्ष की आयु अथवा 20 वर्ष की सेवा पूर्ण करने पर शासकीय सेवकों के अभिलेखों की छानबीन कर अनिवार्य सेवानिवृत्त के निर्देश का हवाला देते हुए रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी को विधिसंगत कार्यवाही कर कार्यालय को जानकारी से अवगत कराने कहा है.

अब पाला जिला शिक्षा अधिकारी के पाले में है. जिला निर्वाचन अधिकारी/कलेक्टर का आदेश है, इसलिए वे भी कुछ करने की स्थिति में नहीं होंगे, वहीं इन शिक्षकों ने खुद है नौकरी से राहत पाने के लिए ऐसे दस्तावेज दे दिए हैं, जिन्हें झुठलाना अब उनके लिए संभव नहीं है. कुल मिलाकर इन शिक्षकों पर इधर कुआं, उधर खाई वाली कहावत लागू होती है, जिसमें जिधर भी गिरें नुकसान तो उन्हें ही होने वाला है.