कुंदन, कुमार पटना। बिहार में वर्ष 2016 में 5 अप्रैल को पूर्ण शराबबंदी लागू की गई थी। आज शराब बंदी के ठीक दस साल हुए हैं। शराब बंदी को लेकर बिहार सरकार हर साल इस मौके पर यानी 5 अप्रैल को जागरूकता अभियान चलाती थी। पूरे राज्य में मद्य निषेध विभाग के द्वारा कई कार्यक्रमों का आयोजन भी कराया जाता रहा है, लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है कि आज के दिन राज्य सरकार ने शराब बंदी के जागरुकता को लेकर कोई कार्यक्रम राज्य में किसी कोने में नहीं किया, जिसे लेकर एक सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या बिहार में बीजेपी की सरकार आने के बाद बिहार में बंद शराबबंदी फिर से चालू हो सकती है।
महिलाओं ने की थी शराबबंदी की मांग
आपको बता दें कि बिहार में वर्ष 2015 में नीतीश कुमार जब चुनावी मैदान में थे, तो महिलाओं ने शराबबंदी की मांग की थी, महिलाओं की इस मांग को आधार बनाकर नीतीश सरकार ने पहले एक अप्रैल 2016 से देशी शराब को बंद करने का निर्णय लिया, उसके बाद सरकार द्वारा जब विदेशी शराब के दुकान खुलवाने की प्रक्रिया शुरू हुई तो महिलाओं ने पूरे बिहार के जगह जगह विदेशी शराब के दुकान पर प्रदर्शन किया, जिसे देखते हुए सरकार ने पूर्ण शराबबंदी की। सदन में सभी दलों ने एक सुर के नीतीश कुमार के निर्णय का साथ दिया था।
बीजेपी ने किया था समर्थन
उस दौरान नीतीश महागठबंधन के साथ सरकार चला रहे थे। यानी राजद के साथ थे फिर भी भाजपा ने शराब बंदी का समर्थन किया था। आज शराबबंदी के दस साल हुए लेकिन इस साल शराबबंदी को लेकर मद्य निषेध विभाग ने भी अपने स्तर से कोई कार्यक्रम नहीं किया। बिहार में शराब तस्करी और जहरीली शराब से मौत को लेकर लगातार खबरें आती रहती है लेकिन सत्ता पक्ष शराब बंदी को उचित ठहराते हुए कारवाई कि बात करते हैं, लेकिन इस साल मद्य निषेध विभाग द्वारा शराब बंदी को लेकर कोई कार्यक्रम नहीं करना सरकार की उदासीनता को उजागर करती है।
शराबबंदी समीक्षा की मांग
वैसे लगातार सदन में भी शराबबंदी की समीक्षा की मांग उठती रही है। सूत्रों से यह भी खबर सामने आ रही है कि शराबबंदी को खत्म करने का भी मन सरकार ने बनाया है। क्योंकि शराबबंदी से जो राजस्व का नुकसान राज्य को हो रहा है। उसका भरपाई करने में सरकार विफल साबित हो रहा है। ऐसे में अब देखना है कि पूर्ण शराबबंदी दिवस पर सरकार किसी भी तरह का कार्यक्रम नहीं कर जनता को क्या संदेश दे रही है? यह तो आनेवाला समय ही बताएगा।
क्या बीजेपी खत्म करेगी शराबबंदी?
लेकिन ऑफ द कैमरा जन प्रतिनिधि ये कहते रहते हैं कि शराबबंदी से बिहार को फायदा से ज्यादा नुकसान ही है। चर्चा तो यह भी है कि अगर बिहार में भाजपा के कोटे का मुख्यमंत्री बनेगा तो शराबबंदी खत्म होगी। अब देखना है कि राज्य में जो नए मुख्यमंत्री बनने के आसार हैं, उसके बाद शराब बंदी कानून को लेकर क्या निर्णय लेती है?
10 साल में जहरीली शराब पीने से मौत
सरकारी आकड़ों की बात करे तो शराबबंदी के इस दस साल में जहरीली शराब पीने से 190 लोगों की मौत हुई है। वहीं, NCRB की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2016 में 156, वर्ष 2018 में 09, वर्ष 2021 में 90, वर्ष 2022 में 100, वर्ष 2023 में 35 और वर्ष 2024 में 25 के आसपास लोगों की मौत हुई है। जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव का कहना है कि, 2016 से अब तक 1,300 से अधिक लोगों की मौत जहरीली शराब से हो चुकी है। उनका आरोप है कि कई मौतों को प्रशासन द्वारा बीमारी या अन्य कारण बताकर छुपा दिया जाता है।
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