नोएडा में इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। नोएडा समेत पूरे देश में लोग इस घटना को लेकर आक्रोशित हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन और अथॉरिटी की घनघोर लापरवाही देखने को मिली। नोएडा में पुलिस, प्रशासन और प्रॉधिकरण के पास सबकुछ है, पर मौके पर अगर जरूरत पड़ जाए तो कुछ भी नहीं है. इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के चार दिन बाद जब रेस्क्यू टीम युवराज की कार को उस 70 फीट गहरे बेसमेंट से निकालने पहुंची तो उसके पास रस्सियों का बंडल था. पुलिस की एक जीप रस्सियों के बंडल से भरी थी, जबकि जिस दिन युवराज अपनी जान बचाने के लिए कार की छत पर खड़े होकर गुहार लगा रहा था… ‘प्लीज मुझे बचा लो, प्लीज मुझे बचा लो’… तो उस दिन रेस्क्यू टीम की रस्सी ही छोटी पड़ गई.
आज जब NDRF की रेक्स्यू टीम पानी भरे बेसमेंट से युवराज मेहता की कार को निकालने पहुंची तो उसके पास सभी इंतजाम थे. रस्सियों का बंडल था, नाव थी और लाइफ जैकेट भी, लेकिन उस दिन इसी टीम के बाद युवराज को बचाने के लिए कुछ भी नहीं था. यहां तक कि टीम जो रस्सी लेकर पहुंची, वो भी छोटी पड़ गई.
आपको बताते चले कि बता दें कि NDRF की टीम ने मंगलवार को 7 घंटे रेस्क्यू चलाकर 70 फीट गहरे बेसमेंट से युवराज की गाड़ी को बाहर निकाला. युवराज की कार को बाहर निकालने के लिए दोपहर करीब 12 बजे NDRF के गोताखोरों की टीम पहुंची थी. सात घंटे तक कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब सात बजे गोताखोरों की दो टीमों ने कार को बाहर निकाला. बताया जा रहा है कि 70 फीट गहरे इस बेसमेंट में दो फ्लोर थे. कार इसके बीच में जा फंसी थी. नीचे वाले हिस्से में मिट्टी ज्यादा थी, जिस जमीन दलदली थी.
शायद इतनी बड़ी रस्सी तब लेकर रेस्क्यू वाले आते तो युवराज आसानी से बाहर आ सकता था. यहाँ तक कि पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की टीम का कहना था कि अगर समय रहते रेस्क्यू किया जाता तो युवराज की जान बचाई जा सकती थी. डॉक्टरों ने यह मेंशन किया कि पानी में डूबने और फेफड़ों में करीब 3:30 लीटर पानी भरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता को कार्डियक अटैक भी आया, जिससे उसकी मौत हुई.
जब सेक्टर-150 बसाया जा रहा था, यहां बिल्डिंगें बन रही थीं, तब नोएडा अथॉरिटी के प्रोजेक्ट मैनेजर, सिविल इंजीनियर… ऐसे लोगों ने खतरनाक 90 डिग्री का T-पॉइंट बनाया, जो सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत की वजह बन गया.
गोताखोर जब बेसमेंट में नीचे गए तो उन्हें वहां सरिए भी नजर आए. युवराज की कार बाहर निकालते समय दिखा कि उसका सनरूफ खुला हुआ था. कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त थी, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि युवराज ने डूबने से पहले सनरूफ से बाहर निकलकर 40 मिनट तक अपनी जान बचाने की गुहार लगाई, लेकिन लापरवाह सिस्टम ने उसकी जान ले ली.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी घटना का संज्ञान लिया. नोएडा के सीईओ लोकेश एम को हटा दिया है, एक JE को भी बर्खास्त किया गया है। वहीं ADG जोन मेरठ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय SIT गठित की गई है। जिसमें मंडलायुक्त मेरठ और PWD के चीफ इंजीनियर भी शामिल हैं। ये टीम 5 दिन में सीएम को जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
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