मोदी सरकार की नीतियों और कोल खदानों के निजीकरण के खिलाफ 3 जुलाई को ट्रेड यूनियने करेंगी विरोध प्रदर्शन

रायपुर। कोविड-19 के दौर में 4 तालाबंदी के बाद अब अनलॉक-1 में भी स्थति में सुधार नहीं आया हैं। लेकिन भाजपा के नेत्तृत्व वाली केंद्र सरकार कोरोना जैसे महामारी के दौर में भी इस संकट की आड़ लेकर देश की सम्पदा व मेहनतकश जनता के हितों की बलि चढ़ाने पर आमादा है । ट्रेड यूनियनों द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि मोदी सरकार की इस जन विरोधी हमलों के खिलाफ देश के समस्त केंद्रीय ट्रेड 3 जुलाई को देशव्यापी विरोध दिवस मनाएंगे इस दिन छत्तीसगढ़ के मजदूर भी पूरे प्रदेश में भी जबर्दस्त विरोध कार्यवाही आयोजित करेंगे । आज ट्रेड यूनियनों के सीटू के राज्य अध्यक्ष कामरेड बी सान्याल की अध्यक्षता में संपन्न वेब राज्यस्तरीय कन्वेशन में यह फैसला लिया गया । कन्वेशन में इंटक , एटक, सीटू, एकतू, एच एम एस, बैंक, बीमा, राज्य व केंद्र कर्मचारी, बी एस एन एल यूनियन के प्रतिनिधि शामिल थे । कन्वेशन में मुख्य प्रस्ताव कामरेड धर्मराज महापात्र ने रखा । इस कन्वेशन जो इंटक अध्यक्षता संजय सिंह, एटक महासचिव हरनाथ सिंह, सीटू महासचिव एम् के नंदी, एकतु महासचिव बृजेन्द्र तिवारी बैंक कर्मी नेता शिरीष नलगोंडवार, दवा प्रतिनिधि यूनियन के प्रदीप मिश्रा ने संबोधित किया । एच एम एस के कार्यकारी अध्यक्ष एच एस मिश्रा, तृतीय वर्ग कर्म संघ अध्यक्ष राकेश साहू, केंद्रीय कर्मचारियों के नेता दिनेश पटेल, मानिक राम राम,आशुतोष सिंह, राजेन्द्र सिंह, बीमा कर्मी नेता सुरेन्द्र शर्मा, के के साहू, प्रवीण मेश्राम भी इसमें प्रमुख रूप से शामिल थे । कन्वेशन में इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया गया कि 150 वर्षो के संघर्षो के बाद हासिल किये गए मजदूरों के अधिकारों को खत्म करने के लिए श्रम कानूनों में मालिक पक्षीय बदलाव करने साथ-साथ कई राज्यों में श्रम कानूनों की सुरक्षा को निलंबित करने का काम कर रही है| इतना ही नहीं केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों का विनिवेश करने तथा थोक में उनका निजीकरण करने रेलवे, प्रतिरक्षा, गोदी तथा बंदरगाह, कोयला, एयर इंडिया, बैंको, बीमा आदि निर्णायक महत्व के सेक्टरों में 100 प्रतिशत फड़ी लाने के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए कोविड-19 के तालाबंदी के आवरण की ओट ली हैं |

भाजपा के आत्मनिर्भर नारे के पीछे उसका इरादा संसाधनो और देश के व्यापार को हड़पने के लिए भारतीय तथा विदेशी ब्रांड के कॉर्पोरेट घराने के पक्ष में कदम उठाना है | कोयला उद्योग में नीलामी भी इसका उदाहरण है प्रदेश के 9 कोल ब्लॉक भी उसमें शामिल है । केंद्र सरकार के 48 लाख कर्मचारियों के महंगाई भत्ता को फ्रीज करने और 68 लाख पेंशनधारियो के महगाई भत्ते को फ्रीज करने के फैसले का नतीजा बुरा होगा |

केंद्र सरकार का 20 लाख करोड़ का पैकेज पीड़ित लोगो के साथ एक धोखा और क्रुर मजाक है क्यों कि इसमें मुख्यत: विभिन्न क्षेत्रों के लिए केवल ऋण की गारंटी है| उसी प्रकार कमर्शियल माइनिंग का गैर क़ानूनी और राष्ट्रविरोधी फैसला इस सरकार के मनसूबे को स्पष्ट करता है |

इसी पृष्टभूमि में देश के ट्रेड यूनियन आंदोलन ने निम्नलिखित मांगो को लेकर आगामी 3 जुलाई को देशव्यापी विरोध दिवस का आह्वान किया है | कन्वेशन ने छत्तीसगढ़ सरकार से भी कोल ब्लॉक नीलामी के खिलाफ झारखंड की तरह सुप्रीम कोर्ट ने अपील की मांग के साथ ही कोयला मजदूरों के 2 से 4 जुलाई के तीन दिन के देशव्यापी हड़ताल का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे प्रदेश में अभूतपूर्व रूप से सफल बनाकर केंद्र सरकार को करारा जवाब देने का आव्हान किया । कन्वेशन में पारित प्रस्ताव में निम्न मांग की गई

मांगे-

  1. इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आने वाले सभी लोगो के बैंक अकॉउंट में अगले 6 माह तक साढ़े 7 हजार रुपये ट्रांसफर किये जाये|
  2. सभी जरुरतमंद परिवार के व्यक्तियों को निशुल्क 10 किलो अनाज उपलब्ध कराया जाये|
  3. सभी प्रवासी कामगारों को भोजन और काम दिए जाने की गारंटी की जाये |
  4. सार्वजनिक स्वास्थ सेवा को सभी के लिए लिए मजबूत किया जाये |
  5. कमर्शियल माइनिंग का फैसला वापस लिया जाये|
  6. सार्वजनिक क्षेत्र के बैंको का विलय करने की नीति पर रोक लगाई जाये |
  7. PF के ब्याज दर को कम करने का फैसला वापस लिया जाये|
  8. कोरोना वारियर्स के वर्करों को व्यापक सुरक्षा मुहैय्या कराये जाये
  9. ट्रेड यूनियनों के 12 सूत्री मांग पत्र पर अविलम्ब करवाई शुरू किया जाये |
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