ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जारी युद्ध 18वें दिन में पहुंच गया है. जंग के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग प्रभावित हुए हैं. इस जंग का असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर भी पड़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान को चेतावनी जारी है. होर्मुज ऑफ स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही पर भी प्रभावित हुई है, इसे सुरक्षित करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सहयोगी देशों से यहां वॉरशिप भेजने की अपील की थी, लेकिन होर्मुज पर ट्रंप की इन उम्मीदों को झटका लगता हुआ नजर आ रहा है. कई देश ऐसा करने से साफ इनकार करते हुए नजर आ रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है.
अमेरिका-ईरान के बीच छिड़ी जंग को दो सप्ताह से ज्यादा हो चुके हैं. ट्रंप की सहयोगी देशों से होर्मुज ऑफ स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील को झटका लगता दिख रहा है.
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग को 17 दिन बीत चुके हैं. युद्ध का असर इन देशों के साथ-साथ दुनिया के अन्य देशों पर भी पड़ रहा है.
सोमवार सुबह डाउनिंग स्ट्रीट से एक ब्रीफिंग के दौरान, कीर स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन होर्मुज ऑफ स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए सहयोगियों के साथ एक व्यवहार्य योजना पर काम कर रहा है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यह नाटो मिशन नहीं होगा.
जर्मनी ने भी वॉरशिप भेजने से इनकार कर दिया है. रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘यह हमारा युद्ध नहीं है, हमने इसे शुरू नहीं किया है.’
दक्षिण कोरिया ने भी ट्रंप के अनुरोध पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया है. रविवार (15 मार्च) को दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा कि देश ‘इस मामले पर अमेरिका के साथ घनिष्ठ रूप से संवाद करेगा और सावधानीपूर्वक समीक्षा के बाद निर्णय लेगा.’
जापान भी मौजूदा हालात में किसी भी तरह का कोई सुरक्षा अभियान शुरू करता नहीं दिख रहा है. रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी ने सोमवार (16 मार्च) को संसद में स्पष्ट रूप से कहा, ‘ईरान की वर्तमान स्थिति में हम फिलहाल समुद्री सुरक्षा अभियान शुरू करने पर विचार नहीं कर रहे हैं.’
ऑस्ट्रेलिया ने भी होर्मुज ऑफ स्ट्रेट में वॉरशिप भेजने से मना कर दिया है. कैबिनेट सदस्य कैथरीन किंग ने भी सोमवार (16 मार्च) को सरकारी प्रसारक मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में होर्मुज ऑफ स्ट्रेट में नौसैनिक जहाज भेजने से इनकार कर दिया.
वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के एक प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि बीजिंग ट्रंप के अनुरोध को स्वीकार करेगा या नहीं, लेकिन कहा कि सभी पक्षों की जिम्मेदारी है कि वे स्थिर और निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करें.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से वो देश सबसे ज्यादा प्रभावित हैं जो सीधे तौर पर इस चोक पॉइंट से जुड़े हैं और तेल आयात पर निर्भर हैं. भारत और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी सीधे तौर पर इस रास्ते पर निर्भर हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज स्ट्रेट को लेकर पूरी तर अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं और सहयोगी देशों से मदद की अपील में भी उनकी सख्ती साफ झलक रही है. उन्होंने कहा है कि अगर ये देश हमारी मदद करते हैं तो बहुत अच्छा है और अगर नहीं करते हैं, तो भी बहुत अच्छा है.
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