अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच व्हाइट हाउस में तीन घंटे लंबी बंद कमरे की बैठक हुई. ट्रंप ने ईरान के साथ परमाणु समझौते की बातचीत जारी रखने पर जोर दिया, लेकिन सैन्य विकल्प भी खुला रखा. इजरायल ने अपनी सुरक्षा चिंताओं को दोहराया. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच वॉशिंगटन में हुई बैठक में ईरान पर कोई निर्णायक समझौता नहीं हुआ. दोनों नेताओं ने दो घंटे से अधिक समय तक बंद कमरे में चर्चा की. यह ट्रंप के सत्ता में लौटने के बाद नेतन्याहू के साथ उनकी सातवीं बैठक थी.

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बुधवार को वॉशिंगटन में हुई मुलाकात के बाद ईरान पर कोई निर्णायक समझौता नहीं हुआ.

बैठक के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस मुलाकात में कोई पक्का फैसला नहीं हुआ. उन्होंने कहा, “बस इतना तय हुआ है कि मैंने कहा है कि ईरान से बातचीत चलती रहनी चाहिए, ताकि देखा जा सके कि कोई समझौता बन पाता है या नहीं.” ट्रंप ने आगे कहा, “अगर समझौता हो जाता है तो वही हमारी पहली पसंद होगी. अगर नहीं हुआ, तो फिर आगे क्या करना है, वो बाद में देखा जाएगा.” उन्होंने यह भी साफ नहीं किया कि इस बात पर नेतन्याहू की सहमति बनी या नहीं.

बैठक में गाज़ा पर भी चर्चा हुई, जहां ट्रंप ने संघर्ष विराम और पुनर्निर्माण योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश की. लेकिन हमास के हथियार छोड़ने और  इजरायली सैनिकों के पीछे हटने पर मतभेद के कारण प्रगति धीमी रही. ट्रंप ने कहा, ‘हमने गाज़ा और पूरे क्षेत्र में हो रहे अद्भुत प्रगति पर चर्चा की. मध्य पूर्व में सच में शांति है.’ नेतन्याहू का दौरा काफी शांतिपूर्ण था, ओवल ऑफिस में मीडिया को कोई एक्सेस नहीं दिया गया. केवल एक छोटी फोटो जारी की गई जिसमें दोनों नेता हाथ मिलाते दिखे.

नेतन्याहू ने कहा कि  इजरायल ट्रंप की बोर्ड ऑफ पीस पहल में शामिल होगा. उन्होंने अमेरिकी विदेश सचिव मार्को रुबियो से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर लिखा, ‘मैंने  इजरायल का बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का हस्ताक्षर कर दिया.’

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. उन्होंने कहा कि अगर कूटनीति काम नहीं करती, तो अन्य विकल्प भी खुले हैं. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी संकेत दिया कि फिलहाल अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि उसे परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है. उन्होंने कहा कि अगर कूटनीति काम नहीं करती, तो अन्य विकल्प भी खुले हैं.

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