सुदीप उपाध्याय, बलरामपुर। मध्य प्रदेश सीमा से लगे ग्राम पंचायत तुगुवा स्थित शासकीय माध्यमिक शाला इन दिनों जिले भर में चर्चा का विषय बनी हुई है. इस विद्यालय ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक समर्पण और नवाचार के साथ कार्य करें, तो शासकीय विद्यालय भी निजी विद्यालयों की तरह नहीं, बल्कि उनसे बेहतर शिक्षा का केंद्र बन सकते हैं.

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विद्यालय में बच्चों को केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं रखा जा रहा है, बल्कि नैतिक शिक्षा, व्यवहारिक ज्ञान और रोजगार-मुखी प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. बच्चों में अनुशासन, समयबद्धता, स्वच्छता और शिष्टाचार जैसे गुणों का विकास किया जा रहा है, जिससे उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके.

विद्यालय परिसर का वातावरण साफ-सुथरा और अनुशासित है. कक्षाओं में नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति अपनाई जा रही है, जिससे बच्चे रुचि के साथ पढ़ाई कर रहे हैं. शिक्षक बच्चों को समूह कार्य, गतिविधि आधारित अध्ययन और व्यवहारिक उदाहरणों के माध्यम से विषयों को समझा रहे हैं. इसका सकारात्मक असर बच्चों के शैक्षणिक स्तर पर साफ नजर आ रहा है.

इस व्यवस्था से न केवल छात्र बल्कि अभिभावक भी बेहद संतुष्ट हैं. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि शासकीय विद्यालयों में इसी तरह की गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और व्यवस्था स्थायी रूप से लागू हो जाए, तो अभिभावकों को बच्चों को निजी विद्यालयों में भेजने की मजबूरी नहीं रहेगी. तुगुवा माध्यमिक शाला की यह पहल क्षेत्र के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रही है.

विद्यालय की सराहना करते हुए जिला कलेक्टर राजेंद्र कटारा ने कहा कि तुगुवा माध्यमिक शाला में पदस्थ शिक्षक बच्चों को रोजगार-मुखी शिक्षा देने, स्कूली पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने और विद्यालय के वातावरण को बेहतर बनाए रखने में सराहनीय कार्य कर रहे हैं. ऐसे शिक्षक बधाई के पात्र हैं. उन्होंने कहा कि शासन स्तर पर भी ऐसे शासकीय विद्यालयों को हर संभव सहयोग दिया जा रहा है, ताकि गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा को और मजबूत किया जा सके.

जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि विद्यालय में वर्तमान में 144 छात्र दर्ज हैं तथा प्रधान पाठक सहित चार शिक्षक पदस्थ हैं. उन्होंने कहा कि विद्यालय को शासन से प्राप्त सभी मदों का शत-प्रतिशत उपयोग किया गया है. शिक्षकों की मेहनत और योजनाओं के सही क्रियान्वयन से बच्चों की पढ़ाई का स्तर लगातार बेहतर हो रहा है.

जिला शिक्षा अधिकारी ने यह भी कहा कि भविष्य में विद्यालय को और अधिक सुविधायुक्त बनाने, शैक्षणिक संसाधनों को बढ़ाने तथा बच्चों को निरंतर नवाचार से जोड़ने के लिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. तुगुवा की शासकीय माध्यमिक शाला आज यह संदेश दे रही है कि मजबूत इच्छाशक्ति और समर्पण से सरकारी स्कूल भी शिक्षा के क्षेत्र में नई मिसाल कायम कर सकते हैं.