पाकिस्तान की संगत में पगलाया तुर्की, अमेरिका, फ्रांस सहित दस देशों को राजदूतों को देश छोड़ने कहा, जानिए क्या है मामला…

अंकारा (तुर्की)। पाकिस्तान की संगत में लगता है तुर्की का भी दिमाग फिरने लगा है. घरेलू मामलों में दखल देने के आरोप में तुर्की ने अमेरिका, फ्रांस समेत 10 देशों के राजदूतों को देश से निकालने का आदेश दिया है. इस संबंध में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने शनिवार को विदेश मंत्रालय से आदेश जारी करने का निर्देश दिया है.

आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने की वजह से सालों से FATA की ग्रे लिस्ट में बने पाकिस्तान के साथ दो दिन पहले ही तुर्की को भी सूची में शामिल कर दिया गया है. इस झटके से तुर्की के लोग अभी उबरे नहीं हैं कि राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने उत्तर पश्चिमी तुर्की के शहर एस्किसेहिर में एक भाषण के दौरान अमेरिका, फ्रांस के अलावा जर्मनी, कनाडा, डेनमार्क, नीदरलैंड, नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड और न्यूजीलैंड के राजदूतों को देश से निकाले जाने की बात कह दी. एर्दोगन ने कहा कि इस कार्रवाई से ये देश तुर्की को जानेंगे और समझेंगे.

अमेरिका समेत इन देशों ने सामाजिक कार्यकर्ता उस्मान कवला की रिहाई का समर्थन किया है, जिसके बाद तुर्की के राष्ट्रपति ने यह कार्रवाई की है. उस्मान कवला चार साल से जेल में हैं, उन पर 2013 में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के लिए फंडिंग करने का आरोप है. तुर्की सरकार का आरोप है कि 2016 में हुए असफल तख्तापलट के पीछे भी उस्मान कवला का ही हाथ था, हालांकि उन्होंने इन आरोपों से हमेशा इनकार किया है. कवला को 2017 में गिरफ्तार किया गया था. यही नहीं उन पर 2013 में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के लिए फंडिंग करने का आरोप है.

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