UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद की भारत की अचानक तीन घंटे की यात्रा अब सिर्फ एक कूटनीतिक शिष्टाचार नहीं लगती. इस छोटी-सी मुलाकात ने पूरे दक्षिण एशिया की रणनीतिक तस्वीर को हिला दिया है. भारत से जाने के बाद उन्होंने दोस्ती का सबूत देते हुए 900 भारतीयों को जेल से रिहा करने का फैसला किया है. वहीं अब पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष रूप से एक बड़ा झटका दे दिया है. UAE ने पाकिस्तान के इस्लामाबाद एयरपोर्ट के संचालन का सौदा ही रद्द कर दिया है. पाकिस्तान के न्यूज आउटलेट एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इसकी पुष्टि की है. रिपोर्ट में कहा गया है कि UAE ने इस प्रक्रिया में रुचि खो दिया है. ये पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर की नींद उड़ाने के लिए काफी है.

पाकिस्तान के साथ कौन सी डील तोड़ी?

पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली के बीच अगस्त 2025 में UAE ने इस्लामाबाद एयरपोर्ट संभालने पर सहमति दी थी. लेकिन अब UAE ने न सिर्फ इस डील से हाथ खींच लिए, बल्कि किसी स्थानीय साझेदार का नाम तक तय नहीं किया. आधिकारिक तौर पर इसे ‘रुचि खत्म होने’ का मामला बताया गया, मगर समय और हालात कुछ और कहानी कहते हैं. रिपोर्ट में सीधे तौर पर यह नहीं कहा गया है कि इस्लामाबद एयरपोर्ट की डील टूटने के पीछे कोई राजनीतिक वजह है. लेकिन यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब UAE और सऊदी अरब के बीच खींचतान का असर पूरे दक्षिण एशिया में दिखने लगा है. पाकिस्तान ने सऊदी के साथ डिफेंस डील की, और वह तुर्की को इसमें जोड़कर ‘इस्लामिक नाटो‘ बनाना चाहता है, जो UAE को नाराज करने के लिए काफी है.

सऊदी से करीबी बनी पाकिस्तान की मुसीबत?

इतना ही नहीं पाकिस्तान के डील के खत्म होन की खबर ऐसे समय में आई है जब UAE और भारत के रिश्ते नई ऊंचाई पर पहुंच रहे हैं. 19 जनवरी को शेख मोहम्मद बिन जायद अचानक दिल्ली पहुंचे. पूरा दौरा सिर्फ तीन घंटे का था, लेकिन नतीजे दूरगामी माने जा रहे हैं. पाकिस्तान के दोनों खाड़ी देशों से पुराने और आर्थिक रिश्ते हैं, लेकिन उसका झुकाव हमेशा सऊदी अरब की ओर ज्यादा रहा है. सितंबर 2025 में पाकिस्तान और सऊदी अरब ने आपसी रक्षा समझौता किया था, जिसमें अब तुर्की के भी जुड़ने की चर्चा है.

पाकिस्तान पर नहीं रहा भरोसा

पाकिस्तान और UAE के रिश्ते पहले काफी मजबूत रहे हैं, खासकर एविएशन के क्षेत्र में. 1980 के दशक में एमिरेट्स एयरलाइंस को खड़ा करने में पाकिस्तान की बड़ी भूमिका थी. तकनीकी मदद से लेकर स्टाफ तक, शुरुआत में सब कुछ पाकिस्तान ने ही दिया था. एमिरेट्स की पहली उड़ान भी दुबई से कराची गई थी. लेकिन समय के साथ पाकिस्तान की अपनी एयरलाइन और पूरा एविएशन सिस्टम कमजोर होता चला गया. आज वहां बार-बार हादसे होते हैं, पायलटों के लाइसेंस में गड़बड़ियां सामने आती हैं और तकनीक भी पुरानी है. ऐसे हालात में इस सिस्टम को सुधारना किसी भी निवेशक के लिए आसान नहीं है. UAE के पास मुश्किल जगहों पर काम करने का अनुभव है. उसकी कंपनी अफगानिस्तान के कई एयरपोर्ट चला रही है. इसके बाद भी पाकिस्तान से पीछे हटना साफ दिखाता है कि अब भरोसा पहले जैसा नहीं रहा.

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