UAE President Mohammed bin Zayed Al Nahyan India Visit: संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई (UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान आज भारत आ रहे हैं। मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के निमंत्रण पर भारत आ रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद यह शेख मोहम्मद बिन जायद की भारत की तीसरी आधिकारिक यात्रा है। यह दौरा भारत-UAE संबंधों में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस दौरे में भारत-UAE बड़ी रणनीतिक साझेदारी, व्यापार, निवेश, ऊर्जा और वैश्विक मुद्दों पर अहम बातचीत होने की उम्मीद है।

यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक भरोसे की मिसाल है। हाल के वर्षों में भारत और UAE के बीच लगातार उच्चस्तरीय दौरे हुए हैं। सितंबर 2024 में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद और अप्रैल 2025 में दुबई के क्राउन प्रिंस और UAE के रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम भारत आए थे।

भारत की तरफ से विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 13 से 15 दिसंबर 2025 तक अबू धाबी का दौरा किया, जहां उन्होंने 16वीं भारत-यूएई संयुक्त आयोग बैठक और 5वें रणनीतिक संवाद की सह-अध्यक्षता की। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2023 के अंत और 2024 के दौरान कई बार यूएई का दौरा किया, जिनमें फरवरी 2024 की ऐतिहासिक यात्रा शामिल है, जब उन्होंने अबू धाबी में BAPS हिंदू मंदिर का उद्घाटन किया था। दोनों देशों के नेताओं की हालिया मुलाकात जून 2024 में इटली में हुए G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी हुई।

शेख मोहम्मद और पीएम मोदी में क्या बात होगी?

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद भारत-UAE बड़ी रणनीतिक साझेदारी की प्रगति की समीक्षा करेंगे और भविष्य के सहयोग के नए क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच विचार-विमर्श होने की संभावना है। यह यात्रा व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा और लोगों के बीच संपर्क को और मजबूत करने में नई गति देने वाली मानी जा रही है।

कैसे हैं भारत-UAE के रिश्ते?

भारत और UAE के संबंध राजनीतिक समझ, सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत आर्थिक सहयोग पर आधारित हैं। UAE भारत के प्रमुख व्यापार और निवेश साझेदारों में शामिल है। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (CEPA), लोकल करेंसी सेटलमेंट सिस्टम और द्विपक्षीय निवेश संधि जैसे समझौतों ने रिश्तों को और मजबूती दी है। ऊर्जा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती देता है।

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