देहरादून। उत्तराखंड में सचिवालय के भीतर एक विधायक एवं उनके सहयोगियों द्वारा शिक्षा निदेशक के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। जिसको लेकर नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। इस प्रकार की हिंसा बर्दाश्त से बाहर है।
संवैधानिक मर्यादाओं के प्रतीक होते हैं
यशपाल आर्य ने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि केवल किसी दल या क्षेत्र का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि वे जनता की आकांक्षाओं, विश्वास और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रतीक होते हैं। ऐसे में उनका आचरण मर्यादित, संयमित और जिम्मेदार होना अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में हिंसा, मारपीट या दबाव की राजनीति को उचित नहीं ठहराया जा सकता।
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समाधान दायरे में रहकर करना चाहिए
जनसमस्याएँ स्वाभाविक हैं। उनके समाधान के लिए संवाद, विचार-विमर्श, ज्ञापन, प्रश्न, बहस तथा शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन जैसे लोकतांत्रिक माध्यम उपलब्ध हैं। यही लोकतंत्र की शक्ति और परंपरा है। असहमति होना स्वाभाविक है, परंतु असहमति का समाधान संवैधानिक और संस्थागत दायरे में ही किया जाना चाहिए। हम सभी जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा करते हैं कि वे लोकतंत्र की गरिमा को बनाए रखें, संयम और संवाद की परंपरा को सुदृढ़ करें तथा जनहित में सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका निभाएँ।
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यशपाल आर्य ने कहा कि सरकारी अधिकारी और कर्मचारी—चाहे वे किसी भी स्तर पर हों, नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपनी जिम्मेदारियाँ निभाते हैं। उनके साथ हिंसक या अपमानजनक व्यवहार न केवल निंदनीय है, बल्कि इससे प्रशासनिक तंत्र और जनता के विश्वास को भी आघात पहुँचता है। किसी भी प्रकार का शारीरिक या मानसिक दबाव समस्या का समाधान नहीं, बल्कि स्थिति को और अधिक जटिल बनाता है।
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