देहरादून. अंकिता भंडारी मामले में हरीश रावत ने धामी सरकार पर करारा हमला बोला है. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, सरकार उपवाच: ! प्रमाणिक प्रमाण दो, हम किसी भी जांच के लिए तैयार हैं. सरकार जी, डरी हुई मगर दृढ़ संकल्पित. यह संकल्पित अंकिता का, उसकी हत्या होने से कुछ घंटे पहले दिया गया बयान या बातचीत का साक्ष्य में उतना ही मूल्य है, जितना डाइंग डिक्लेरेशन का. अंकिता का बयान था कि VIP को विशेष सेवा देने के लिए मेरे ऊपर दबाव डाला जा रहा है, मुझे डराया-धमकाया जा रहा है. क्या सरकार आपने इस बयान की जांच की? जिस तर्ज पर FIR में दर्ज कुछ अज्ञात हत्यारों की भी जांच होती है. क्या उस अज्ञात VIP को आपने FIR का पार्ट बनाया, उसकी जांच की?
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आगे हरीश रावत ने कहा, फिर यह जो साक्ष्य नष्ट किए गए हैं, CCTV कैमरे तोड़े गए, रिजोर्ट में बुलडोजर फिराया गया और आग लगाई गई. क्या जांच के दौरान इन संभावित दोषियों को भी खोजा गया? इसीलिए उत्तराखंड उसी दिन से कह रहा है कि सरकार वह VIP कौन, जो आपको देहरादून से दिल्ली तक कर दे रहा है मौन ? आज उस मौन को तोड़ने के लिए जब कुछ नई बातें उभरकर सामने आई हैं तो यह कोई नई मांग नहीं है कि CBI, माननीय हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की देख-रेख में जांच करे, यह पुरानी मांग है सिर्फ धधकते अंगारों के ऊपर कुछ समय की राख जम गई थी, अब इस बार वह राख हट रही है.
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उन्होंने कहा, नई FIR, जिसमें VIP का उल्लेख हो वह दर्ज होनी चाहिए और नये सिरे से अनवेक्षण होना चाहिए. यदि जांच अधूरी रहेगी और यह मांग भी बनी रहेगी तो जनता स्वयं अपनी मांग की पूर्ति का रास्ता निकाल लेगी, आज नहीं तो कल. मगर वह VIP कौन? जिसके लिए हमारी अस्मिता पर हाथ डालने का प्रयास हो रहा था, उस VIP को उत्तराखंड खोज करके ही मानेगा.
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