देहरादून. आपदा प्रभावित क्षेत्रों के लिए बजट में कोई भी प्रस्ताव होने का दावा करते हुए धामी सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा, पिछली बरसात में आपदाग्रस्त हुए क्षेत्रों में मैं गया था. उसके बाद से आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लोगों के पत्र, टेलीफोन और संदेश भी आ रहे हैं, समाचार पत्रों में भी बहुत कुछ छप रहा है. मैंने बजट प्रस्तावों में भी बहुत बारीकी से खोजा, मगर कुछ ठोस उपाय आपदाग्रस्त गांवों या घरों के आर्थिक विस्थापन और विस्थापन दोनों के नहीं दिखाई दिए. यहां तक कि लोग अपने संसाधन जोड़कर के कुछ सरकार की इतनी मदद मिल जाए कि उससे वह अपने पुराने बर्बाद हुए व्यवसाय को फिर से खड़ा कर सकें, उस ओर भी कोई संकेत मुझे नहीं दिखाई दिया. मेरे मन में बहुत उथल-पुथल है, मैं इन क्षेत्रों में जाना चाहता हूं.
इसे भी पढ़ें- पौड़ी गढ़वाल और नैनीताल में बनेगी मल्टीस्टोरी पार्किंग, शहरी विकास विभाग की मिली मंजूरी
आगे हरीश रावत ने कहा, राजनीति के कुछ अपने चक्कर होते हैं. यह चक्कर कुछ और फुसफुसाने लगें उससे पहले मानवीय कर्तव्य और विशेष तौर पर एक पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में मेरा दायित्व बनता है कि मैं उन प्रमुख स्थानों पर अवश्य जाऊं, जहां के लोग अब भी सरकार से बहुत कुछ अपेक्षा कर रहे हैं, ताकि उनकी अपेक्षाओं को एक और स्वर मिल सके. मैं उनकी आवाज बनना चाहता हूं. मैं जानता हूं, मैं जो कुछ कहूंगा, चुनाव के वर्ष में उसको सुनना पड़ेगा.
इसे भी पढ़ें- प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान बनेंगे राज्य के अतिथि गृह, गेस्ट हाउस को आधुनिक और आकर्षक बनाने की दिशा में हो रहा काम
आगे हरीश रावत ने कहा, मैंने फैसला किया है कि मैं 23 और 24 मार्च को पहले धराली, जिला उत्तरकाशी जाऊंगा और आपदा प्रभावितों से मुलाकात करूंगा और वहां हो रहे आपदा कार्यों का जायजा लूंगा और उत्तरकाशी में प्रेस वार्ता करूंगा. वहां से आने के बाद फिर मैं रुद्रप्रयाग, थराली और कनलगढ़ घाटी में जाऊंगा और इसी बीच में मैं एक बार बांदलघाटी की तरफ भी जाऊंगा. देखते हैं वहां पुनर्निर्माण और पुनर्वास की क्या स्थिति है? कहीं ऐसा तो नहीं कि वहां भी “दिया तले अंधेरा हो रहा हो”…!!
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें

