देहरादून. सीएम धामी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तराखंड वासियों को 40 हजार करोड़ रुपए के फायदा होने का दावा किया था. इसी बयान पर अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने सीएम धामी पर हमला बोला है. हरीश रावत ने कहा, सीएम धामी ने जनता से झूठ बोला है. उनका दावा है कि उत्तराखंड को 5-7 हजार करोड़ रुपए का प्रतिवर्ष नुकसान झेलना पड़ रहा है.
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अभी दो दिन पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के बजट प्रस्तावों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड वासियों को 40 हजार करोड़ रुपए के फायदे की बड़ी प्यारी व मीठी सी लोरी सुनाई. लोरी सुनने के बाद मैंने बजट प्रस्तावों के ब्यौरे पर नजर डाली तो मेरी नजर सोलहवें वित्त आयोग की सिफारिशें जिन्हें वित्त मंत्री जी ने स्वीकार किया है, उन पर गई. 15वां वित्त आयोग जिसकी अध्यक्षता एक पैदाइशी कांग्रेस मैन एन के सिंह ने की थी. उन्होंने हमारे जैसे राज्यों के लिए दो महत्वपूर्ण फैसले किए.
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आगे उन्होंने कहा, पहला फैसला यह था जो राज्य घाटे से ग्रसित हैं उन्हें घाटे से उभरने के लिए विशेष सहायता दें और दूसरा जो राज्यों का शेयर है केन्द्रीय करों में 40% उसके वितरण के लिए मानकों का निर्धारण, जिसमें तीन आधार जनसंख्या, क्षेत्रफल और वनाच्छादित क्षेत्र, बड़े फैक्टर माने जाते थे. सोलहवां वित्त आयोग जिसकी अध्यक्षता एक खालिस भाजपाई करा रहा है. उन्होंने घाटे वाले राज्यों को आर्थिक सहायता देने के निर्णय को हटा दिया और साथ-साथ जंगल और क्षेत्रफल, जनसंख्या के बजाय जीडीपी को प्रमुख मानक निर्धारण कर दिया. सीधा अर्थ है जो पहले से विकसित राज्य हैं जीडीपी उन्हीं की बड़ी होगी, उन्हीं को ज्यादा केंद्रीय करों में ज्यादा शेयर मिलेगा.
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आगे हरीश रावत ने ये भी कहा कि हमारे जैसे राज्य जो जंगलों के संरक्षण का राष्ट्रीय कर्तव्य निभा रहे हैं उनको सोलहवें वित्त आयोग ने लगभग ठेंगा दिखा दिया. सीधा अर्थ है जो केंद्रीय करों में राज्यों का हिस्सा है उसमें तुलनात्मक रूप से उत्तराखंड, हिमाचल, तेलंगाना जैसे राज्यों का हिस्सा कटेगा और घाटे की प्रतिपूर्ति न होने का सीधा अर्थ है कि हमको 5-7 हजार करोड़ रुपए का प्रतिवर्ष नुकसान. मैं क्षमा चाहता हूं कि जब आप सब उत्तराखंड वासी मुख्यमंत्री जी के 40 हजार करोड़ रुपए की मीठी-मीठी लोरी का आनंद ले रहे हैं तो मैंने उसमें शायद कुछ रंग में भंग कर दिया है. मगर क्या करूं आदत ही ऐसी है.
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