देहरादून. अंकिता भंडारी मामले में पूर्व सीएम हरीश रावत का बड़ा बयान सामने आया है. हरीश रावत ने कहा कि अंकिता भंडारी की हत्या का प्रसंग उत्तराखंड के मान-स्वाभिमान और सम्मान से जुड़ा है. अंकिता ने उसकी हत्या किए जाने से पहले जिस VIP को विशेष सेवा देने के लिए दबाव बनाए जाने का जिक्र किया था और उनकी माताश्री ने एक ऐसे नाम का खुलासा भी किया था. इससे यह तथ्य पूर्णतः सिद्ध हो गया है कि वनंतरा रिज़ॉर्ट प्रेशर पॉलिटिक्स के लोगों का अड्डा था. अब उर्मिला और सुरेश राठौड़ जी की बातचीत में जो बातें उभरी हैं और जो तथ्य सामने आए हैं, उसके आलोक में तीन लोग अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं. एक अंकिता, जिसकी हत्या हो गई है. दूसरे ये दो लोग- उर्मिला और सुरेश राठौड़.

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आगे हरीश रावत ने कहा, बेटी अंकिता को न्याय तभी मिल सकता है, जब उर्मिला और सुरेश राठौड़ सुरक्षित रहेंगे और उनको कोर्ट का अभयदान मिलेगा. मुझे जिस प्रकार की बौखलाहट सत्ता और सत्तारूढ़ पार्टी में दिखाई दे रही है और पुलिस जिस प्रकार सत्ता के हाथ का खिलौना बन गई है, उसे देखते हुए इन दोनों महत्वपूर्ण गवाहों की सुरक्षा की चिंता हो रही है. किसका व्यक्तिगत रिकॉर्ड क्या है, हमारे लिए यह महत्वपूर्ण नहीं है. हमारे लिए महत्वपूर्ण इस संदर्भ में बचे-खुचे साक्ष्यों की रक्षा का प्रश्न है. पहले भी साक्ष्य नष्ट किए गए. होना तो यह चाहिए था कि अंकिता की हत्या किए जाने से पूर्व अंकिता का कथन FIR का हिस्सा होना चाहिए था, उसके आधार पर इन्वेस्टिगेशन होना चाहिए था और कोर्ट के सामने वह तथ्य लाया जाना चाहिए था.

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आगे उन्होंने कहा, अब अंकिता की आत्मा न्याय के लिए गुहार लगा रही है. उत्तराखंड में चारों तरफ जो गुस्सा दिखाई दे रहा है, वह और कुछ नहीं बल्कि अंकिता की आत्मा है-एक ऐसी बेटी, जो अपनी मां को बरसात में चूती हुई छत से बचा सके, इसके लिए नौकरी करती है ताकि उसकी मां जिंदगी का सुकून देख सके. इसलिए आज उत्तराखंड में जगह-जगह नारे लग रहे हैं कि अंकिता, तेरे हत्यारों को-चाहे वे कहीं भी हों, कितने ही बड़े क्यों न हों-हम उन्हें ढूंढकर निकालेंगे और कानून के हवाले करेंगे.