देहरादून. पशुधन बीमा योजना को बंद करने को लेकर पूर्व सीएम हरीश रावत ने धामी सरकार पर हमला बोला है. उन्होंने कहा, यात्रा मार्गों में घोड़े-खच्चरों का संचालन स्थानीय लोगों की आजीविका का एक बड़ा स्रोत है. यात्रा के मार्ग कठिन हैं, कभी संक्रमित बीमारियां भी हो जाती हैं और एक घोड़े या खच्चर के मरने का अर्थ है कि एक परिवार की पूरी आर्थिक बर्बादी. उसको सहारा देने के लिए हमारी सरकार ने पशुधन बीमा योजना प्रारंभ की थी और इस योजना के तहत कुछ हिस्सा बीमा राशि का राज्य सरकार अदा करती थी और कुछ हिस्सा उसका पशुपालक करते थे. बल्कि एससी, एसटी और शायद बीपीएल कैटिगरी के घोड़ा संचालकों के लिए 75% तक यह राशि सब्सिडी आधारित थी. इससे किसी पशु दुर्घटना की स्थिति में आजीविका धारी को बड़ा सहारा मिल जाता था. वह दूसरे घोड़े-खच्चर खरीद कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ा लेता था.

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आगे हरीश रावत ने कहा, राज्य सरकार ने अब यह योजना तो समाप्त कर दी, क्योंकि गरीब से भाजपा का कोई वास्ता ही नहीं है. दूसरी तरफ इन्होंने कुछ प्राइवेट कंपनियों और बजाज कंपनी आदि के हित में अघोषित तरीके से यह निर्देश जारी कर दिए हैं कि जिला पंचायत उन्हीं घोड़ा-खच्चर मालिकों को यात्रा के दौरान घोड़ा-खच्चर संचालन की अनुमति देगी, जो लोग बजाज कंपनी से अपने घोड़े-खच्चर का बीमा करवाएंगे, जिनका बीमा नहीं है, उन्हें यात्रा में घोड़ा-खच्चर संचालित करने की अनुमति नहीं दी जाती है.

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आगे उन्होंने कहा, इससे गरीब घोड़ा-खच्चर संचालकों के सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है. आप बजाज के हित में कई लोगों की गर्दन काट रहे हैं और उनकी आजीविका पर संकट खड़ा कर रहे हैं. यदि बीमा अनिवार्य करना है, तो फिर उसे पूर्व की भांति जैसा हमारी सरकार ने सब्सिडी आधारित किया था, वैसा ही किया जाना चाहिए. कुछ हिस्सा राज्य सरकार वहन करती थी और कुछ हिस्सा पशुपालक करता था, जिससे एकमुश्त भार पशुपालक के ऊपर नहीं आता था.