देहरादून. पूर्व सीएम हरीश रावत ने गढ़वाली और कुमाऊनी को अष्टम सूची में स्थान देने की मांग की है. हरीश रावत ने कहा, हम सब चाहते हैं कि हमारी भाषा को, जिसे तकनीकी संबोधन में बोली कहा जाता है, उसे अष्टम सूची में स्थान दें. अर्थात गढ़वाली, कुमाऊनी भाषाएं संविधान की अष्टम सूची में स्थान पावें.

आगे हरीश रावत ने कहा, लोकसभा की अध्यक्ष की पीठ पर अपनी रंग-बिरंगी पगड़ी के साथ सतपाल महाराज जी विराजमान थे. संसदीय कार्य के राज्य मंत्री के तौर पर मैं उस समय सदन में सरकार की तरफ से प्रतिनिधित्व कर रहा था और जगदंबिका पाल, जो आज भाजपा के महत्वपूर्ण सांसद हैं, उस समय कांग्रेस के सांसद थे. उन्होंने भोजपुरी भाषा को अष्टम सूची में सम्मिलित करने का प्रसंग उठाया. कई और स्थानों से हरियाणवी, राजस्थानी भाषाओं को भी अष्टम सूची में स्थान देने की बात सदस्यों ने कही.

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आगे उन्होंने कहा, सतपाल महाराज जी ने भी पीठ से कुछ ऑब्जर्वेशन दिए और मुझसे अपेक्षा की कि मैं सरकार की तरफ से आश्वासन दूं. मैंने उठकर के आश्वासन दिया कि भोजपुरी, राजस्थानी, कुमाउनी और गढ़वाली भाषा को अष्टम सूची में स्थान मिले, इसके लिए सरकार हर संभव प्रोत्साहन देगी और इन भाषाओं को कैसे अष्टम सूची में सम्मिलित किया जाए, इसके लिए कदम उठाए जाएंगे.

आगे हरीश रावत ने कहास मैं समझता हूं आश्वासन समिति में ये मामला विचारार्थ आता होगा. अष्टम सूची में स्थान पाने के लिए किसी भी भाषा या बोली में बड़ी मात्रा में साहित्य सृजन आवश्यक है, जिसको साहित्य परिषद द्वारा मान्यता दी जानी हो. भाषा का हर पक्ष संपुष्ट होना चाहिए. भाषा के पक्ष को संपुष्ट करने में स्थानीय व्यंग्यों, मुहावरों, कथानकों, कटाक्षों का भी बड़ा भारी स्थान होता है.

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हरीश रावत ने ये भी कहा कि मैं भी चाहता हूं कि कुमाउनी, गढ़वाली, जौनसारी भाषा के विकास में मेरी तरफ से कुछ प्रोत्साहन हो सके. मैं एक ऐसा विशेषज्ञ ढूंढ रहा हूं, जो मेरे पेज पर एक ऐसे पृष्ठ का संचालन करे, जिस पर व्यंग्य और मुहावरे कुमाउनी-गढ़वाली में आएं और वह उस पेज का संचालन करे और उनमें जो बेहतर मुहावरा हो, उस मुहावरे को प्रतिमाह ₹10,000 पुरस्कार के रूप में दिया जाए. मैं उसके लिए अपनी एक माह की आमदनी, जो मुझे पेंशन आदि से मिलती है, उसको मैंने अर्पित करने का निर्णय लिया, तो अब मैं ऐसे विशेषज्ञ को छांट रहा हूं, जो मेरे फेसबुक पेज का उपयोग मुहावरों और कथानकों आदि के लिए करने का कष्ट करेंगे.