देहरादून. पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन की दो कंपनियों को गुजरात और राजस्थान शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया है, जिसे लेकर नेता विपक्ष ने सरकार पर करारा हमला बोला है. यशपाल आर्य ने कहा, पिथौरागढ़ में 130 पर्यावरण बटालियन की दो कंपनियों को गुजरात और राजस्थान शिफ्ट करने के निर्णय के विरोध में पिछले 48 दिनों से पूर्व सैनिकों का आंदोलन जारी है. यह आंदोलन अब केवल एक मांग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सम्मान, अधिकार और पहचान की लड़ाई बन चुका है.

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आगे उन्होंने कहा, दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार अब तक इस गंभीर और संवेदनशील विषय पर मौन साधे बैठी है. यह वही पूर्व सैनिक हैं, जिन्होंने देश की सीमाओं पर कठिन परिस्थितियों में अपनी सेवाएं दीं, लेकिन आज वे अपने ही अधिकारों के लिए सड़कों पर संघर्ष करने को मजबूर हैं. 130 पर्यावरण बटालियन कोई साधारण इकाई नहीं है. इसकी स्थापना वर्ष 1994 में राज्य के पहले थल सेनाध्यक्ष जनरल बी.सी. जोशी द्वारा की गई थी. यह बटालियन सीमांत क्षेत्र में न केवल सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और आपदा प्रबंधन में भी इसने अहम भूमिका निभाई है.

आगे यशपाल आर्य ने कहा, पिथौरागढ़ जैसे भूकंप और दैवी आपदाओं की दृष्टि से संवेदनशील जिले में इस बटालियन की उपस्थिति एक मजबूत सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करती रही है. इसके माध्यम से स्थानीय पूर्व सैनिकों को रोजगार भी मिला है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिली. ऐसे में इन कंपनियों को राज्य से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि जनभावनाओं के भी विपरीत है.

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यशपाल आर्य ने ये भी कहा कि यह स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े करती है कि क्या देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को अब अपनी ही जमीन पर अपने अधिकारों के लिए लड़ाई लड़नी पड़ेगी? क्या उनके त्याग और बलिदान का यही सम्मान है? सरकार को चाहिए कि वह इस विषय पर तुरंत संज्ञान ले, पूर्व सैनिकों के साथ संवाद स्थापित करे और इस निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए एक न्यायपूर्ण समाधान निकाले. पूर्व सैनिकों की आवाज को अनसुना करना न केवल अन्याय है, बल्कि यह उनके समर्पण और राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा का अपमान भी है.