देहरादून. धामी सरकार सुशासन का दावा करती है, लेकिन नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने तमाम दावों की पोल खोलते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा. यशपाल आर्य ने शिक्षा व्यवस्था और जंगली जानवरों के मुद्दे पर धामी सरकार को आइना दिखाया. उन्होंने बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ औऱ जंगली जानवरों के आंतक को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए.

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यशपाल आर्य ने कहा, पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की समस्याएं भी लगातार बढ़ती जा रही हैं. आज स्थिति यह है कि जंगली जानवरों से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हो रहा है. बंदर, सूअर, नीलगाय और अन्य जंगली जानवर खेतों में घुसकर पूरी फसल नष्ट कर देते हैं. कई जगहों पर तो स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि जंगली जानवरों के कारण गांवों में रहने वाले लोगों के जीवन तक पर खतरा पैदा हो गया है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि फसलों की सुरक्षा के लिए घेरबाड़ जैसी आवश्यक व्यवस्था के लिए बजट में बेहद मामूली धनराशि का प्रावधान किया गया है.

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आगे उन्होंने कहा, यह दर्शाता है कि सरकार को पहाड़ के किसानों की वास्तविक समस्याओं का न तो सही आंकलन है और न ही उनके समाधान के प्रति पर्याप्त संवेदनशीलता दिखाई दे रही है! पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक होती जा रही है. गांवों के सरकारी स्कूल लगातार बंद हो रहे हैं. कई स्कूलों में छात्र संख्या इतनी कम हो गई है कि उन्हें बंद करने की नौबत आ गई है. अब क्लस्टर स्कूलों की अवधारणा के नाम पर भी छोटे-छोटे स्कूलों को बंद करने की प्रक्रिया चल रही है.

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इसका परिणाम यह हो रहा है कि गांवों के छोटे बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता है. कई स्थानों पर बच्चों को कई किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है. इससे न केवल शिक्षा प्रभावित होती है, बल्कि कई बार बच्चों की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती है.