देहरादून। पूर्व सीएम हरीश रावत ने पीआरडी कर्मचारियों को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि ये फिर से अपेक्षा के शिकार हैं। राज्य के हित में है कि हम इन्हें कैडर के रूप में किस तरीके से नियमितिकृत करें, जिस तरीके से दूसरे ऐसे फोर्सेज के लिए नियम बनाए गए हैं, उन नियमावलियों को किस तरीके से इन पर लागू किया जा सकता है, उस पर विचार किया जाना चाहिए।
हरीश रावत ने कहा कि जब हम पीआरडी कहते हैं तो एक ऐसी संस्था, जो एक ऐतिहासिक परंपरा के साथ हमें उत्तर प्रदेश से प्राप्त हुई है उसका समर्पित भाव से काम करने वाले लोगों का चेहरा उभरकर सामने आता है। जिस मैंडेट या अपेक्षा के साथ इस संगठन का गठन किया गया। उसमें इस तरीके की सशक्त व्यवस्था के लिए जो अधिनियम था उसका उपयोग किया गया, तो स्पष्ट तौर पर जिस काम में रेगुलर पुलिस का उपयोग नहीं किया जा सकता है या कुछ दिक्कतें आ सकती हैं और यह एक प्रकार से होमगार्ड्स के बैकअप फोर्स के रूप में निरंतर कार्य करते आ रहे हैं।
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हमारी सरकार ने इस दिशा में ध्यान दिया
हरीश रावत ने आगे कहा कि मगर इनको सुविधाएं देने के मामले में, दूसरे राज्य कर्मियों के तरीके से अधिकार देने के मामले में, वेतन-भत्ते देने के मामले में हमेशा सरकारों को संकोच रहा है। हमारी सरकार ने थोड़ा इस दिशा में ध्यान दिया और काम प्रारंभ किया था। मुझे लगता है कि ये फिर से अपेक्षा के शिकार हैं। राज्य के हित में है कि हम इन्हें कैडर के रूप में किस तरीके से नियमितिकृत करें, जिस तरीके से दूसरे ऐसे फोर्सेज के लिए नियम बनाए गए हैं।
सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए
उन नियमावलियों को किस तरीके से इन पर लागू किया जा सकता है, उस पर विचार किया जाना चाहिए ताकि ये भी सुनिश्चित भविष्य के साथ एक निर्धारित काम और अपने कर्तव्य को पूरा करने का काम कर सकें। मैं समझता हूँ कि सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। जो सरकार अपने कर्मचारियों का ध्यान नहीं दे सकती है या अपने सहायकों का ध्यान नहीं रखती है, वह सरकार अच्छी सरकार नहीं कहलाती है।
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